Tryambakeshwar Temple में श्रद्धालुओं से बदसलूकी का आरोप, पूर्व ट्रस्टी ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार
Bombay High Court: त्र्यंबकेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं से बदसलूकी और कुप्रबंधन को लेकर पूर्व ट्रस्टी ललिता शिंदे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में शिकायत की। उन्होंने दर्शन का समय बढ़ाने की मांग की है।
- Written By: रूपम सिंह
त्र्यंबकेश्वर मंदिर (फोटो- सोशल मीडिया)
Tryambakeshwar Temple Mismanagement: विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, आद्य ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले आम श्रद्धालुओं के साथ होने वाली बदसलूकी, धक्का-मुक्की और देवस्थान ट्रस्ट के कुप्रबंधन का एक गंभीर मामला सामने आया है। त्र्यंबकेश्वर देवस्थान संस्थान की पूर्व ट्रस्टी ललिता संदीप शिंदे ने 1 जून 2026 को बकायदा एक पत्र लिखकर इस पूरे मामले की शिकायत मुंबई उच्च्च न्यायालय (बॉम्बे हाईकोर्ट) के मुख्य न्यायाधीश,
नासिक के जिला सत्र न्यायाधीश, जिलाधिकारी और त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष से की। ललिता शिंदे ने आरोप लगाया है कि जहां एक तरफ केंद्र व राज्य सरकार और जिला प्रशासन आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला (2026-27) को सफल बनाने के लिए जोरदार तैयारियों में जुटा है, वहीं त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट सुलभ दर्शन के लिए कोई उचित कदम उठाता नहीं दिख रहा है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि देश के कोने-कोने से आने वाले आम श्रद्धालु मुफ्त ‘धर्मदर्शन’ की लाइन में 7 से 8 घंटे तक इंतजार करते हैं, लेकिन जब वे मुख्य गर्भगृह के पास पहुंचते हैं, तो वहां मौजूद कर्मचारी उन्हें आधे सेकंड के भीतर धक्का मारकर, कंधे से खींचकर बाहर निकाल देते हैं। इस धक्का-मुक्की और मारपीट को लेकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में मामले भी दर्ज हो चुके हैं। पूर्व ट्रस्टी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देवस्थान ट्रस्ट का पूरा ध्यान केवल इस बात पर है कि श्रद्धालुओं से अपनी आय कैसे बढ़ाई जाए।
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दर्शन के लिए बढ़ाई जाए समय सीमा
शनिवार, रविवार और सोमवार को उमड़ने वाली भारी भीड़ और आगामी कुंभ मेला को ध्यान में रखते हुए मंदिर को सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक खुला रखा जाए, दर्शन की समय अवधि बढ़ाने के लिए ‘तुंगार मंडली ट्रस्ट’ और ‘पुजारी मडली के साथ बैठक कर कर्मचारियों को दिन में दो पालियों में सेवा देने के निर्देश दिए जाएं।
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200 रूपए में टिकट बेंचकर कराए जा रहे दर्शन
नासिक मंदिर में 200 रुपये प्रति टिकट की दर से ‘पेड़ दर्शन’ धड़ल्ले से चालू है, जिसके खिलाफ उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। भक्तों द्वारा दिए जाने वाले करोड़ों रुपये के दान की रसीद बैंकों में जमा है और ट्रस्ट को उस पर भारी ब्याज मिल रहा है, लेकिन फिर भी भक्तों की बुनियादी सुविधाओं और सुचारू दर्शन के लिए कोई नियोजन नहीं है। रात करीब 8:30 बजे की आरती के बाद भगवान के मुखौटे को शयनगृह में रख दिया जाता है।
इसके बाद बची हुई दर्शन कतारें में मौजूद 15 से 20 हजार लोगों को मंदिर के कर्मचारी जल्द से जल्द बाहर निकालने और मंदिर बंद करने की कोशिश करते हैं ताकि उनकी ड्यूटी जल्दी खत्म हो सके।
गर्भगृह के पास होने वाले श्रद्धालुओं के हाल और धक्का-मुक्की को रोकने के लिए त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट तुरंत कोई ठोस और संवेदनशील निर्णय ले। पूर्व ट्रस्टी ललिता शिंदे ने साफ किया है कि उनके पास इस कुप्रबंधन और बदसलूकी के वीडियो व फोटोग्राफी भी उपलब्ध है, जिन्हें वे प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रशासनिक स्तर पर प्रस्तुत कर रही हैं ताकि आम भक्तों को न्याय मिल सके।
