नार-पार-गिरणा नदीजोड़ परियोजना को मिली प्रशासनिक मंजूरी, 7465 करोड़ से बदलेगी उत्तर महाराष्ट्र की तकदीर

Nashik water crisis: नार-पार-गिरणा नदीजोड़ परियोजना के लिए 7465.29 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी। मंत्री दादा भुसे ने किया निरीक्षण; मालेगांव, जलगांव और कसमादे की बदलेगी तस्वीर।
Nar-Par-Girna river-linking project received administrative approval of Rs 7465.29 crore. Minister Dada Bhuse inspected sites to boost North Maharashtra irrigation.
नदीजोड़ परियोजना प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Nashik Nar Par Girna project: नासिक और जलगांव जिले के लाखों निवासियों के लिए बहुप्रतीक्षित 'नार-पार-गिरणा नदीजोड परियोजना' अब धरातल पर आकार ले रही है। स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने हाल ही में मालेगांव क्षेत्र के वडेल और तलवाडे में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का संयुक्त निरीक्षण किया। सरकार ने इस परियोजना (चरण-1) के लिए 7465.29 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

परियोजना का लक्ष्य और लाभ

इस परियोजना के माध्यम से नार, पार और औरंगा घाटियों से 10.64 टीएमसी पानी गिरणा घाटी में लाया जाएगा। इस कार्य के लिए 11 मई को ही 4116 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है। मंत्री भुसे ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही भूमिपूजन के साथ निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना से मालेगांव, कसमादे, सुरगाणा और जलगांव जिले के अनेक गांवों में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी।

मालेगांव क्षेत्र में निरीक्षण के बाद मंत्री भुसे का बड़ा ऐलान

इसके अलावा, मालेगांव के मालमाथा क्षेत्र के लिए 450 करोड़ रुपये की स्वतंत्र सिंचाई एवं जलापूर्ति योजना भी लागू की जा रही है। इस परियोजना में नहरों की क्षमता बढ़ाने और पाइपलाइन बिछाने का व्यापक कार्य शामिल है नहर क्षमता विस्तारः गिरणा बाई और दाई नहर तथा मोसमसाल नहर की वहन क्षमता बढ़ाई जा रही है। साखली क्र. 0 से 29,200 मीटर तक बाई नहर की क्षमता 179 से बढ़ाकर 345 क्यूसेक की जाएगी।

लिफ्ट और पाइपलाइन सिंचाई

अजंग लघु सिंचाई योजना से मोसम नदी के बैराज तक और वहां से वलवाडी बांध तक बंद पाइपलाइन द्वारा पानी पहुंचाया जाएगा। विस्तृत वितरणः वलवाडी बांध से खाकुर्डी, कंकराले, कुकाने, करंजगव्हाण, हाताने, टोकडे और जलकू जैसे गांवों तक लगभग 13 किमी लंबी गुरुत्वाकर्षण बंद पाइपलाइन से जलापूर्ति होगी। अस्तरकरण (कंक्रीट लाइनिंग) पर फैसलाः मंत्री भुसे ने स्पष्ट किया कि नहरों के साइफन स्ट्रक्चर के पास और रिसाव (सीपेज) वाले स्थानों को छोड़कर शेष नहरों का अस्तरकरण नहीं किया जाएगा।

द्वितीय चरण से बदलेगी तकदीर

परियोजना का दूसरा चरण और भी व्यापक होगा, जिससे 20.66 टीएमसी अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा। चणकापूर बांध से प्रस्तावित 72 किमी लंबी बाई नहर कलवण, सटाणा और मालेगांव के सूखा प्रवण क्षेत्रों की 3,06,280 एकड़ भूमि को सिंचित करेगी। यह न केवल जल सुरक्षा की गारंटी है, बल्कि उत्तर महाराष्ट्र के औद्योगिक और कृषि विकास के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।

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