नवभारत संपादकीय: जेन जी का बढ़ता आक्रोश, युवाओं के सवालों से घिरती व्यवस्था
Gen Z India: देश की नई पीढ़ी शिक्षा, सुशासन और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर मुखर हो रही है। पेपर लीक और व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
जेन जी, युवा, पेपर लीक, सुशासन, छात्र आंदोलन,(नवभारत डिजाइन फोटो)
Gen Z Youth Movement: देश में युवाओं की नई पीढ़ी (जेन जी) शिक्षित जागृत व सजग है। वह समस्याओं और चुनौतियों को खुली आंखों से देखती है। उसे इस बात की समझ है कि उसके साथ छल और अन्याय किया जा रहा है। इस पीढ़ी के अपने तर्क हैं। वह अंधभक्त नहीं है और किसी नेता को भगवान मान लेने की दकियानूसी मानसिकता नहीं रखती।
इन युवाओं के अपने तर्क और विश्लेषण हैं। इन नौजवानों का आक्रोश लगातार तमाम परीक्षाओं में हो रही पेपर लीक पर है जिसने उनका भविष्य धूमिल कर रखा है। सुशासन देना तो दूर, हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार चरम पर है।
मंदिरों को चंदा चोरी, वोट खरीदी, विपक्षी पार्टियों को तोड़ना, चुनाव में धांधली, एसआईआर में वैध मतदाताओं के नाम काट देना, सिस्टम में अक्षमता, विपक्ष की अवहेलना कर उसको अनसुनी करना और संवेदनहीनता, शिक्षा तंत्र को कमजोर व जर्जर करना, जैसी बातों ने युवा मन को बेचैन कर दिया है। यह पीढ़ी यथास्थिति बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है। यह सब पढ़े-लिखे, प्रबुध्द नौजवान हैं, जो किसी के बहकावे में न आकर स्वयंस्फूर्ति से आंदोलन में उत्तरे हैं।
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‘कॉकरोच’ टिप्पणी से जन्मा युवा आंदोलन
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को क्या पता था कि उनकी नाराजगी भरी टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी को जन्म देगी, नए वकीलों और युवा पीढ़ी को कॉकरोच कह देना तिरस्कारपूर्ण था लेकिन युवाओं ने इस कॉकरोच प्राणी को ऐसा आंदोलन का प्रतीक बना लिया, जो सदियों से अपना अस्तित्व बनाए हुए है।
यह कहना निराधार होगा कि कोई इन युवाओं का राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम शहरों में युवा अपनी मर्जी से सड़कों पर आए। उन्हें मालूम था कि वे एक निलेज व्यवस्था से टकरा रहे हैं, जो उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है, बल्कि उन पर अपनी पुलिस के जरिए लाठी प्रहार, आंसू गैस का इस्तेमाल कर उनका दमन करने पर उतारू हो जाएगी। अपने ही देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का इस तरह कुचला जाना अत्यंत निंदनीय है।
युवा आंदोलनों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है
चीन में लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को थियान आन मेन चौक में गोलियों से भूना गया था। अरब सिप्रंग के दौरान ट्यूनीशिया से शुरु हुआ था। युवाओं ने अपने प्रदर्शन से नई क्रांति ला दी थी। नेपाल में जेन जेड के आंदोलन ने सत्ता परिवर्तन कर दिया। युवा शक्ति को कम आंकते हुए उनकी उपेक्षा करना बाहुत बड़ी भूल है।
सत्ताधारियों की यह गलतफहमी खत्म हो जानी चाहिए कि अपनी मनमानी नीतियां लादकर, खोखले वादे और राजनीतिक सौदेबाजी कर लोकतंत्र को गिरवी रखा जा सकता है तथा जनता के मौन को उसकी सहमति माना जा सकता है।
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काठ को होडी बार-बार आग पर नहीं चढ़ती। युवा मन विचलित है। उसे यथास्थिति स्वीकार नहीं है। इसी पीढ़ी पर आगे चलकर देश की राजनीतिक, आर्थिक न्यायिक व सामाजिक व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी आएगी। हमारे शासनकर्ता विचार करें कि वह इन्हें कैसा भारत सौंपना चाहते हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
