Student Death Nashik: परीक्षा के लिए ली लिफ्ट बनी मौत का सफर, 9वीं के छात्र की बस के नीचे आने से मौत
Student Death News: नाशिक के सातपूर में परीक्षा देने जा रहे 15 वर्षीय चेतन गांगुर्डे की सड़क हादसे में मौत। दिव्यांग पिता और बीमार मां का इकलौता सहारा छिना। शिक्षकों ने की आर्थिक मदद।
- Written By: गोरक्ष पोफली
अपघात की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik Satpur Road Accident: नासिक के सातपूर स्थित प्रबुद्धनगर में रहने वाले 15 वर्षीय चेतन गांगुर्डे के लिए बुधवार का दिन परीक्षा का था। सातपूर कॉलोनी के मनपा स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाला चेतन रोज पैदल ही स्कूल जाता था। लेकिन बुधवार को परीक्षा के लिए देर न हो जाए, इस चिंता में उसने एक बाइक सवार से लिफ्ट मांग ली। दुर्भाग्य से, यह लिफ्ट उसके जीवन की आखिरी सवारी साबित हुई। कुछ ही दूरी पर पीछे से आ रही एक निजी बस ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर में चेतन सड़क पर गिर गया और सीधे बस के पहिए के नीचे आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
दिव्यांग पिता और बीमार मां का इकलौता सहारा छिना
चेतन की मौत से केवल एक छात्र ही नहीं गया, बल्कि एक अत्यंत गरीब परिवार का भविष्य भी उजड़ गया। चेतन के पिता दिव्यांग हैं और उसकी मां अक्सर बीमार रहती हैं। घर में एक छोटा भाई और बुजुर्ग दादा-दादी भी हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में चेतन न केवल अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था, बल्कि स्कूल के बाद छोटा-मोटा काम करके परिवार का पेट पालने में भी मदद करता था। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि चेतन बहुत ही होनहार और समझदार लड़का था। उसकी मौत की खबर सुनते ही पूरे प्रबुद्धनगर में मातम छा गया है।
शिक्षकों ने बढ़ाया मदद का हाथ: जुटाए 2 लाख रुपये
अपने एक होनहार और मेहनती छात्र को खोने का गम स्कूल के शिक्षकों को भी बुरी तरह कचोट रहा है। चेतन के परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए सातपूर कॉलोनी की मनपा स्कूल के शिक्षकों ने मानवता की मिसाल पेश की। शिक्षकों ने आपस में और स्थानीय लोगों के सहयोग से चंदा इकट्ठा किया और करीब दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि गांगुर्डे परिवार को सौंपी। हालांकि, यह रकम उस कमी को कभी पूरा नहीं कर सकती जो चेतन के जाने से हुई है, लेकिन इसने दुख की घड़ी में परिवार को एक छोटा संबल जरूर दिया है।
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शहर में बढ़ता ‘ट्रैफिक’ और सुरक्षा पर सवाल
इस हादसे के बाद सातपूर और आसपास के क्षेत्रों में भारी वाहनों की रफ्तार और ट्रैफिक व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि स्कूल के पास वाले रास्तों पर भारी वाहनों की गति पर अंकुश लगाया जाए और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए। चेतन के पड़ोसियों का कहना है कि अगर वह उस दिन रोज की तरह पैदल जाता, तो शायद आज वह जीवित होता। इस एक छोटी सी लिफ्ट ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है।
