नासिक के सातपुर में कचरे के ढेर, नागरिकों ने उठाए स्वास्थ्य पर सवाल; इलाके में बढ़ा कचरा संकट

Nashik Public Health Concern: नासिक के सातपुर क्षेत्र में कचरे के ढेर और सफाई व्यवस्था की लापरवाही से नागरिक परेशान हैं। प्रभाग सीमा विवाद के कारण सफाई कर्मचारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
Garbage Piles in Satpur, Nashik: Citizens Raise Health Concerns; Waste Crisis Escalates in the Area
Nashik Satpur Garbage Issue ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Satpur Garbage Issue: नासिक औद्योगिक क्षेत्र सातपुर के रिहाइशी इलाकों में नगर निगम की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रभागों की सीमाओं के तकनीकी पेंच में उलझकर सफाई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, जिसका खामियाजा हजारों नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

उपमहापौर के निरीक्षण के दौरान क्षेत्र की कई गंभीर समस्याएं सामने आई। शनि मंदिर से सम्राट अपनाघर तक मुख्य सड़कों के किनारे कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं।

नागरिकों का आरोप है कि यहां हफ्तों तक सफाई नहीं होती और कचरा सड़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कचरे के ढेरों में आग लगाए जाने की घटनाओं से पूरे इलाके में जहरीला धुआं फैल रहा है।

इससे बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की है कि घंटागाड़ी के कर्मचारी यह कहकर कचरा उठाने से मना कर देते हैं कि यह इलाका उनके प्रभाग में नहीं आता।

अधिकारियों में हड़कंप

शिकायत मिलते ही उपमहापौर विलास शिंदे ने अधिकारियों के लश्कर के साथ मौके पर धावा बोला, घनकचरा प्रबंधन विभाग के संचालक डॉ. आवेश पलोड और स्वच्छता निरीक्षक चिंतामण पवार की उपस्थिति में उपमहापौर ने कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए।

शिंदे ने स्पष्ट किया कि प्रभाग की सीमा का बहाना बनाकर नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता, उन्होंने अगले 24 घंटो के भीतर विशेष सफाई अभियान चलाकर कचरा हटाने के निर्देश दिए।

उपमहापौर ने आदेश दिया कि तीनों प्रभागों (8, 9 और 11) के सफाई कर्मी आपसी समन्वय से करम करें ताकि भविष्य में 'नो मैन्स लैंड का बहाना न बनाया जा सके।

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