

Maharashtra Fake Call Racket: ऑनलाइन ठगी के मामले हर जगह तेजी से बढ़ रहे हैं और 'जामताड़ा' रैकेट इसके लिए कुख्यात है। लेकिन 'जामताड़ा' की तरह ही महाराष्ट्र में भी फर्जी कॉल सेंटरों के माध्यम से दुनिया भर के नागरिकों को ठगकर सैकड़ों करोड़ रुपये का गोरखधंधा चल रहा है।
यह गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया कि इस मामले में आईपीएस अधिकारी दत्ता कराले और दो पुलिस अधीक्षकों की भी संलिप्तता है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय की छठी मंजिल से संरक्षण मिले बिना इतने बड़े पैमाने पर फर्जी कॉल सेंटर और धन की हेराफेरी संभव नहीं है।
गुरुवार को गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए सपकाल ने आगे कहा कि तथाकथित ढोंगी तांत्रिक अशोक खरात के साथ आईपीएस अधिकारी एवं वर्तमान में नाशिक के डीआईजी दत्ता कराले के संबंधों के वीडियो हाल ही में मीडिया में सामने आए हैं। हमें जानकारी मिली है कि कराले और पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल तथा सोमनाथ घार्गे का भी इस फर्जी कॉल सेंटर रैकेट से संबंध है। सीबीआई द्वारा 8 अगस्त 2025 और 11 सितंबर 2025 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, नाशिक और इगतपुरी में छापेमारी कर इस रैकेट को चलाने वालों को गिरफ्तार किया गया। बड़ा सवाल यह है कि सीबीआई को इगतपुरी में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी मिली और उसने कार्रवाई की, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। इसका जवाब महाराष्ट्र पुलिस के मुखिया को देना चाहिए।
सपकाल ने कहा कि सीबीआई Maharashtra Fake Call Center मामले की जांच कर रही है। मेरा सवाल यह है कि राज्य के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस क्या इस मामले में सीबीआई से जानकारी लेकर उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे या हमेशा की तरह 'क्लीन चिट' देंगे, इससे पहले कराले सहित ये दोनों अधिकारी ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में कार्यरत थे। उस समय भी वहां ऐसे कॉल सेंटर चल रहे थे।
पुलिस ने छापा मारकर संदीप सिंह और विशाल यादव नामक आरोपियों पर मामूली कार्रवाई कर उन्हें छोड़ दिया। बाद में जब इन तीनों अधिकारियों की पोस्टिंग नाशिक क्षेत्र में हुई, तब इन्हीं आरोपियों की मदद से फिर से कॉल सेंटर शुरू किए जाने की जानकारी मिली है। खास बात यह है कि ये सभी आरोपी ठाणे, रायगड और पालघर क्षेत्र के निवासी है।