मंत्री गिरीश महाजन व विराेध करने वाली महिलाकर्मी (सोर्स: सोशलम मीडिया)
Girish Mahajan Speech Protest: महाराष्ट्र के नासिक स्थित पुलिस परेड ग्राउंड में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित मुख्य समारोह में एक अप्रिय घटना घटी। राज्य के ग्राम विकास मंत्री गिरीश महाजन जब जनता को संबोधित कर रहे थे, तब एक महिला कर्मचारी ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम न लेने पर सार्वजनिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया।
नासिक के पुलिस परेड ग्राउंड में 77वें गणतंत्र दिवस का मुख्य जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था। ध्वजारोहण के पश्चात जब जिले के प्रभारी और ग्राम विकास मंत्री गिरीश महाजन उपस्थित जनसमूह और अधिकारियों को संबोधित करना शुरू किया, तभी वहां मौजूद लोगों के बीच से एक महिला तेजी से मैदान की ओर दौड़ पड़ी। अचानक हुई इस गतिविधि से समारोह में मौजूद वीवीआईपी (VVIP) क्षेत्र और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया।
She should be punished or suspended, @Dev_Fadnavis. Set an example so no one dares to repeat thispic.twitter.com/8JjZzbsyOQ — Moana (@ladynationalist) January 27, 2026
हंगामा करने वाली महिला की पहचान वन विभाग की कर्मचारी माधुरी जाधव के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, महिला इस बात से नाराज थी कि मंत्री ने अपने आधिकारिक संबोधन में भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम का उल्लेख नहीं किया। अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए वह अपनी सीट से उठी और नारेबाजी करते हुए सीधे उस क्षेत्र की ओर बढ़ने लगी जहां संबोधन चल रहा था। उनके इस औचक कृत्य से गणतंत्र दिवस के गरिमामय कार्यक्रम में कुछ समय के लिए बाधा उत्पन्न हुई।
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मैदान में सुरक्षा के लिए तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। हंगामा कर रही माधुरी जाधव को बीच में ही रोककर हिरासत में ले लिया गया। इस पूरी घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल रहा, लेकिन पुलिस ने जल्द ही स्थिति को नियंत्रण में ले लिया। इस घटनाक्रम पर मंत्री गिरीश महाजन ने दुख व्यक्त किया है।
वन विभाग में कार्यरत होने के कारण माधुरी जाधव एक जिम्मेदार सरकारी पद पर हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, एक सरकारी कर्मचारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर इस तरह का विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी करना प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस और वन विभाग अब इस पूरी घटना की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। प्रशासन अब महिला कर्मचारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की दिशा में विचार कर रहा है, क्योंकि इसे सरकारी सेवा नियमों के तहत गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है।