

Hussain Dalwai On Rahul Gandhi: मुंबई में एक विशेष बातचीत के दौरान पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने भारतीय राजनीति के ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से राय रखी। उन्होंने राहुल गांधी को भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार बताया, वहीं कांग्रेस आलाकमान को आईना दिखाते हुए मुस्लिम समुदाय की हो रही कथित अनदेखी पर गहरी चिंता व्यक्त की।
हाल ही में पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणी और उसके बाद पैदा हुए तनाव पर हुसैन दलवई ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है और राहुल गांधी की नीतियों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन उन्हें 'कायर' कहना पूरी तरह निराधार है। दलवई ने जोर देकर कहा कि मौजूदा दौर में अगर कोई नेता सीधे तौर पर सत्ता पक्ष की नीतियों को चुनौती दे रहा है, तो वह राहुल गांधी ही हैं। उन्होंने शकील अहमद को अपने शब्दों पर पुनर्विचार करने की सलाह दी और उनके घर पर हमले की किसी भी संभावना को लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
जब दलवई से पूछा गया कि क्या शकील अहमद कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम सकते हैं, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि "मैं शकील को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं, वे एक धर्मनिरपेक्ष और वैचारिक व्यक्ति हैं। वे भाजपा की विचारधारा के साथ कभी मेल नहीं खा सकते।"
बातचीत के दौरान हुसैन दलवई ने राशिद अल्वी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कांग्रेस में मुसलमानों को नजरअंदाज किए जाने की बात कही थी। दलवई ने कहा कि आज देश में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं और उन्हें निरंतर अपमानित किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों को मजबूती से खड़ा होना चाहिए था, लेकिन वर्तमान में इसमें कमी दिख रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मुख्यधारा की पार्टियां मुसलमानों का साथ नहीं देंगी, तो वे विकल्प तलाशेंगे।
मुस्लिम मतदाताओं के एआईएमआईएम (AIMIM) की ओर झुकाव पर दलवई ने चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी दरअसल भाजपा की 'बी-टीम' के रूप में काम कर रही है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे इस भ्रम से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि लोग भावनात्मक जुड़ाव के कारण ओवैसी के साथ जाते हैं, जो अंततः धर्मनिरपेक्ष ताकतों को ही कमजोर करता है।
अंत में, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध पर दलवई ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने इसे 'लघु हिंदू राष्ट्र' की मानसिकता करार देते हुए कहा कि यह देश के संविधान का अपमान है। वर्षों से वहां मुस्लिम समाज के लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं और व्यापार कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें रोकना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस को इस तरह के विभाजनकारी फैसलों के खिलाफ मुखर होने की सलाह दी।