Nashik Municipal Controversy( Source: Social Media )
Nashik Municipal Controversy: नासिक महानगरपालिका की आर्थिक मामलों से जुड़ी स्थायी समिति की गुरुवार को हुई बैठक में शहर की गंभीर पानी किल्लत और सड़क कार्यों के कारण खोदे गए गड्डों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा।
नागरिकों के बढ़ते आक्रोश के बीच सदस्यों ने प्रशासन पर तीखी आलोचना करते हुए आक्रामक रुख अपनाया। वहीं दूसरी ओर, करीब 40 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों को बिना चर्चा के मंजूरी दे दी गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
सभापति मच्छिंद्र सानप की अध्यक्षता में सुबह 11:30 बजे शुरू हुई यह बैठक करीब दो घंटे तक चली। बैठक में जलापूर्ति मुख्य मुद्दा बनी रही।
मरम्मत कार्यों के लिए दो दिन का पानी शटडाउन लिया गया था, लेकिन 5 दिन बीतने के बाद भी जलापूर्ति सुचारू नहीं हो सकी। शिवसेना । ठाकरे गुट) की वरिष्ठ नगरसेविका भारती ताजनपुरे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नागरिक सुबह से पानी के लिए धरों के बाहर इंतजार करते हैं, लेकिन प्रशासन समाधान नहीं कर पा रहा है।
पानी की कमी के दौरान टैंकरों की अपर्याप्त संख्या पर भी सवाल उठे। सभापति ने अब प्रत्येक प्रभाग में कम से कम 2 टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में पानी के मुद्दे पर बहस के बीच कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। आडगाव स्थित ट्रक टर्मिनल परियोजना को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने के लिए शर्तों के साथ ठेका देने को मंजूरी दी गई नगररचना और भूमि संपादन विभाग के अस्थायी कर्मचारियों की सेवाओं को 6 महीने के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया।
करीब 40 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्तावों को बिना किसी विस्तृत चर्चा के पास कर दिया गया, सदस्य मुकेश शहाणे सहित अन्य सदस्यों ने पाइपलाइन और सड़क कार्यों के चलते शहर में हुए गड्ढों पर चिता जताई आरोप लगाया गया कि पाइपलाइन जोड़ने के लिए रबर सील जैसी बुनियादी चीजों का उपयोग भी सही तरीके से नहीं हो रहा है।
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जिससे काम घटिया स्तर का हो रहा है। बैठक में राहुल दिये, किरण गमाने, दीपाली कुलकर्णी, अदित्ति पांडे, योगेश गाडेकर और जयश्री गायकवाड़ ने भी भाग लिया और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जलापूर्ति तुरत सुचारू नहीं हुई, तो उन्हें जनता के तीव्र आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।