
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election News: नासिक महानगरपालिका चुनाव में नामांकन वापसी के आखिरी दिन शहर के हर वार्ड में हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा देखने को मिला, कहीं कुछ मिनटों की देरी ने उम्मीदवार की किस्मत का फैसला कर दिया, तो कहीं अपनों के ही बगावती सुरों ने राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। सातपुर डिवीजन में निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा ‘पैनल’ बनाने की कोशिशों ने आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
सातपुर के वार्ड नंबर 8, 9, 10 और 11 में कुल 78 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए हैं, लेकिन असली मुकाबला अब शुरू हुआ है। वार्ड 10 का दंगलः यहां भाजपा के बागी शशिकांत जाधव, मनोज तांबे और शिंदे सेना के बागी रवींद्र देवरे व रोहिणी देवरे मैदान में डटे हुए हैं।
चर्चा है कि ये सभी बागी मिलकर एक ‘स्वतंत्र पैनल’ बना सकते है। यदि ऐसा हुआ तो स्थापित राजनीतिक दलों के आधिकारिक प्रत्याशियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
शिंदे सेना के बागी रवींद्र देवरे ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि जमीन पर काम करने वालों के बजाय अमीर लोगों को टिकट देकर नाइंसाफी की गई है।
भाजपा के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। वार्ड 1 से भाजपा के शहराध्यक्ष और विधायक पर धोखे का आरोप लगाते हुए जनरल सेक्रेटरी अमित घुगे ने निर्दलीय लड़ने का फैसला किया है।
नासिक ईस्ट में नाम वापसी के बाद पूर्व पार्षद जगन पाटिल ने आरोप लगाया कि उन्हें विश्वास, में लिए बिना नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। पंचवटी में एक पूर्व पार्षद को नाम वापस लेने के लिए लाया गया था, लेकिन महज कुछ मिनट की। देरी के कारण उनकी उम्मीदवारी बरकरार रह गई।
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