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नासिक मनपा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार, 6 से 3 पर सिमटी कांग्रेस; गुटबाजी ने तोड़ी कमर
- Written By: अंकिता पटेल
Congress Leadership Crisis: नासिक मनपा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 3 सीटों पर सिमट गई। गुटबाजी और नेताओं के दलबदल से पार्टी की हालत बदतर हुई, शहर अध्यक्ष आकाश छाजेड़ के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election: नासिक महानगरपालिका चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस पार्टी के लिए विनाशकारी संकेत दिए हैं। कभी नासिक मनपा की सत्ता के केंद्र में रहने वाली और शहर की राजनीति की दिशा तय करने वाली यह ऐतिहासिक पार्टी आज अपने सबसे बुरे और दयनीय दौर से गुजर रही है।
इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर गहराती गुटबाजी और ऐन वक्त पर हुए कद्दावर नेताओं के दलबदल ने संगठन की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। पिछले चुनाव में 6 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार केवल 3 सीटों पर सिमटकर रह गई है, जिसके बाद अब शहर अध्यक्ष आकाश छाजेड़ के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।
दलबदलुओं ने बदला चुनावी समीकरण
कांग्रेस की हार की सबसे बड़ी और कड़वी वजह उसके कद्दावर नेताओं का पाला बदलना रहा, संगठन ने जिन चेहरों को सालों तक सींचा, उन्होंने ही ऐन वक्त पर साथ छोड़ दिया।
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पिछले चुनाव के 6 विजयी पार्षदों में से केवल वत्सला खैरे ही पार्टी में रुकी थी। शाहू खैरे (भाजपा), जॉय कांबले, राहुल दिवे, आशा तडवी (शिंदे सेना) और डॉ. हेमलता पाटिल (अजित पवार गुट) जैसे प्रमुख चेहरों ने चुनाव से ठीक पहले पार्टी को मझधार में छोड़ दिया।
दिलचस्प बात यह है कि पाला बदलने वाले इन नेताओं में से केवल राहुल दिवे और आशा तडवी ही अपनी साख बचा सके, जबकि जनता ने शाहू खैरे और डॉ। हेमलता पाटिल जैसे ‘पार्टी बदलने’ वालों को पूरी तरह नकार दिया।
निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ी भारी
काग्रेस की इस करारी हार का एक मुख्य कारण पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भारी अनदेखी मानी जा रही है। चुनाव प्रचार के दौरान न तो प्रदेश स्तर का कोई बड़ा नेता नासिक पहुंचा और न ही स्थानीय संगठन ने जमीन पर पसीना बहाया।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी अध्यक्ष ने केवल अपने करीबियों को तवज्जो दी, जिससे जमीनी स्तर पर संगठन निक्रिय हो गया और मतदाताओं ने कांग्रेस के बजाय अन्य विकल्पों को चुनना बेहतर समझ।
प्रभाग 14: कांग्रेस का आखिरी ‘मजबूत’ किला
पूरे शहर में मिली शर्मनाक शिकस्त के बीच कांग्रेस के लिए एकमात्र सहत भरी खबर प्रभाग 14 से आई है। यह प्रभाग पार्टी के लिए ‘संजीवनी’ साबित हुआ।
पूर्व पार्षद सूफी जीन, नाजिया अत्तार और सामिया खान ने अपनी सीटों पर जीत दर्ज कर पार्टी की लाज बचाई है। दूसरी ओर, प्रभाग 13 से चुनाव लड़ रही पार्टी की वरिष्ठ नेता वत्सला खैरे को हार का स्वाद चखना पड़ा, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका है।
‘एकला चलो’ की जिद ने बिगाड़ा खेल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहर अध्यक्ष आकाश छाजेड़ की रणनीति पूरी तरह फेल रही। पहले उन्होंने ‘एकला चलों’ का नारा देकर कार्यकर्ताओं को जोश में भरा, लेकिन नामांकन के अंतिम दौर में महाविकास आघाड़ी के साथ बेमन से गठबंधन कर लिया।
यह भी पढ़ें:-नासिक चुनाव परिणाम: मनपा में भाजपा का प्रचंड बहुमत, मनसे को करारा झटका
इस ढुलमुल नीति के कारण कई वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवारों के सामने ही आघाड़ी के मित्र दलों ने बागी खड़े कर दिए, जिससे मतों का भारी विभाजन हुआ और जीत भाजपा-शिंदे सेना की झोली में चली गई।
नेतृत्व और रणनीति पर गंभीर सवाल
पार्टी के इस लचर प्रदर्शन के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते संगठन में सर्जरी नहीं की गई, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का सफाया तय है। चुनाव प्रचार के दौरान स्टार प्रचारकों की अनुपस्थिति और चुनावी फंड के कुप्रबंधन ने भी हार की आग में घी डालने का काम किया है।
Nashik municipal election congress worst performance leadership crisis
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