प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Mayor Election: नासिक महानगरपालिका की सातवीं पंचवार्षिक का बिगुल बज चुका है। आगामी 6 फरवरी 2026 का दिन शहर की सत्ता के भविष्या के लिए सबसे बड़ा ‘सुपर फ्राइडे’ साबिता होने वाला है।
इस दिन न केवल शहर को नया महापौर और उप-महापौर मिलेगा, बल्कि मनपा की सबसे ताकतवर इकाई ‘स्थायी समिति’ का भी गठन होगा। नगर सचिव विभाग ने विभागीय आयुक्त के आदेशानुसार चुनावी बिसात बिछा दी है, जिसके बाद नासिक के राजनीतिक गलियारों में भारी सरगर्मी देखी जा रही है।
6 फरवरी को होने वाली विशेष महासभा दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित की जाएगी, पहले सत्र की अध्यक्षता जिलाधिकारी आयुष प्रसाद करेंगे, जिसमें नए महापौर और उप-महापौर का चुनाव होगा।
इसके ठीक बाद नवनिर्वाचित महापौर की अध्यक्षता में दूसरी सभा बुलाई जाएगी, जिसमें उन 16 ‘भाग्यशाली सदस्यों के नामों की घोषणा होगी, जिनके हाथी में शहर के विकास और खजाने की चाबियां होगी, महापौर पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार (3 फरवरी) की सुबह 11 से दोपहर 2 बजे के चीच पूरी की जाएगी।
122 सदस्यीय नासिक मनपा के सदन में इस बार अंकों का खेल पूरी तरह भाजपा के पक्ष में है। स्थायी समिति के एक सदस्य की नियुक्ति के लिए 7।625 का कोटा निर्धारित किया गया है, दलीय संख्या बल के आधार पर सीटों का बंटवारा कुछ इस प्रकार है।
भारतीय जनता पार्टी 72 नगरसेवकों के दम पर भाजपा को सर्वाधिक 10 सीटें मिली है, जिससे समिति पर उनका एकछत्र राज रहेगा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) 26 सदस्यों के साथ शिवसेना के 3 सदस्य समिति का हिस्सा बनेंगे।
शिवसेना (यूबीटी) 15 नगरसेवकों के साथ उद्धय गुट को 2 सीटे प्राप्त हुई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार): 4 सदस्यों वाली एनसीपी को तकनीकी आधार पर 1 सीट मिलेगी, कांग्रेस और मनसेः कम सदस्य संख्या के कारण इन दोनों ही पुराने खिलाड़ियों को इस बार ‘पाचर सेंटर’ से बाहर रहना पड़ेगा।
चूंकि इस बार महापौर की कुर्सी ‘सामान्य महिला’ वर्ग के लिए आरक्षित है। इसलिए सत्ताधारी दल के कद्दावर पुरुष पार्षदों ने अब ‘स्थायी समिति’ के सभापति पद के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
मनपा के भीतर सभी आर्थिक प्रस्तावों को हरी झंडी देने, नए टैक्स लागू करने और टेंडर मंजूर करने की अंतिम शक्त्ति इसी समिति के पास होती है। यही वजह है कि इसे मनपा की ‘तिजोरी’ कहा जाता है। चर्चा है कि भाजपा के भीतर कई वरिष्ठ पार्षद सभापति बनने के लिए लॉबिंग कर रहे है।
6 फरवरी को होने वाली नियुक्ति से पहले ही पार्षदी ने अपनी-अपनी ‘फील्डिंग’ लगानी शुरू कर दी है। पार्टी के आलाकमान को खुश करने से लेकर क्षेत्रीय समीकरण साधने तक के दांव-पेंच आजमाए जा रहे है।
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16 सदस्यों की घोषणा के बाद सभापति के चुनाव के लिए प्रशासन अलग से कार्यक्रम जारी करेगा, सबकी निगाहें अब इस पर टिकी है कि भाजपा अपने किन 10 योद्धाओं को इस महत्वपूर्ण समिति में भेजती है।