नासिक: 30 हजार करोड़ के विकास कार्यों के साथ नशामुक्त कुंभ की तैयारी, मंत्री गिरीश महाजन की बड़ी घोषणा
Nashik Kumbh Mela: नासिक कुंभ मेले को नशामुक्त बनाने का संकल्प, गिरीश महाजन ने बड़े विकास कार्यों और ‘तीर्थाटन’ की अवधारणा पर जोर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Kumbh Development Projects ( Source: Social Media )
Nashik Kumbh Development Projects: आगामी नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का संकल्प राज्य सरकार ने लिया है। इसके लिए आवश्यक कड़े कदम उठाए जाएंगे, ऐसी महत्वपूर्ण घोषणा कुंभमेला मंत्री गिरीश महाजन ने की।
अखिल भारतीय संत समिति द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिषद में देशभर से आए संतों की मांग पर उन्होंने यह मुहर लगाई। मंत्री गिरीश महाजन ने नासिक में दीप प्रज्वलन कर इस दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद का उद्घाटन किया।
इस दौरान उन्होंने कुंभमेले के भव्य स्वरूप का खाका पेश किया। पिछले कुंभ मेले में सरकार ने लगभग 4,500 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि इस बार 28 से 30 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य करने की योजना है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ‘धार्मिक पर्यटन’ शब्द के बजाय ‘तीर्थाटन’ शब्द का उपयोग किया जाएगा, जो हमारी आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है।
महाजन ने वामपंथी विचारधारा पर निशाना साधते हुए कहा कि कुंभ सनातन धर्म की आस्था का पर्व है और सरकार इसे स्वच्छ व सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। शनिवार से शुरू हुई इस परिषद में देशभर के 300 प्रमुख संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इसमें कुंभमेले के धार्मिक और व्यवस्थापन संबंधी मुद्दों पर सत्र आयोजित किए गए। देश के 13 अखाड़ों, 127 संप्रदायों और 159 उपसंप्रदायों के साधु-संत, शंकराचार्य और जगदुरु इस परिषद का हिस्सा बने।
परिषद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरीजी महाराज, महामंत्री महंत राजेंद्रदासजी, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वतीजी और वारकरी संप्रदाय के वरिष्ठ संत शामिल हुए।
कार्यक्रम में महापौर हिमगौरी आडके, उपमहापौर विलास शिंदे, स्थायी समिति सभापति मच्छिंद्र सानप और तुषार भोसले सहित कई लोग उपस्थित रहे।
आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस साधु-संतों से करेंगे संवाद
परिषद के दूसरे दिन यानी 5 अप्रैल को नासिक जिले के स्थानीय साधु-सत और महत बड़ी संख्या में शामिल होंगे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं संतों से सीधा संवाद करेंगे।
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इस दौरान कुंभ मेले की तैयारियों, बुनियादी ढांचे के विकास और संतों द्वारा दिए गए सुझावों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी, सरकार का लक्ष्य कुंभ मेले को न केवल भव्य बनाना है, बल्कि इसे एक अनुशासित और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विश्व पटल पर प्रस्तुत करना है।
