
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Municipal Corporation Probe: नासिक महानगरपालिका में वर्ष 2003 के सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए जमीन देने वाले मूल किसानों को दरकिनार कर, 11 विशिष्ट बिल्डरों को नियम विरुद्ध 55 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। भाजपा विधायक एड। राहुल ढिकले की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
नगर विकास विभाग के कार्यासन अधिकारी बागवान ने वर्तमान आयुक्त मनीषा खत्री को पत्र भेजकर इस मामले में नियमों और प्रावधानों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आरोप है कि तत्कालीन आयुक्त डॉ. अशोक करंजकर के तबादले से ठीक पहले, उच्च न्यायालय के आदेशों की आड़ में लंबित 271 मामलों में से केवल 11 चुनिंदा मामलों को चुनकर 55 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह लाभ मुख्य रूप से शहर के 3 बड़े बिल्डरों को पहुंचाया गया है, जबकि सैकड़ों गरीब किसान आज भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि 2003 के सिंहस्थ के दौरान आडगांव और नांदूर के किसानों ने रिंग रोड और साधुग्राम के लिए अपनी जमीनें दी थीं। प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बावजूद, इन किसानों को आज तक मुआवजे की एक पाई भी नहीं मिली है। 2015 में भी जोड़ने वाले रास्तों के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन मुआवजे के मामले में केवल रसूखदारों को ही प्राथमिकता दी गई। इसी पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ विधायक और किसान अब आक्रामक हो गए है।
पिछले 3 वर्षों में हुए 830 करोड़ रुपये के कथित भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच पहले से ही लंबित है। इस बीच, यह नया 55 करोड़ का मामला सामने आने से दोषी अधिकारियों और संबंधित बिल्डरों में हड़कंप मच गया है, हालांकि, जानकारों का कहना है कि एक साल बीत जाने के बाद भी जांच मुख्य रूप से कागजों तक ही सीमित है।
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इस प्रक्रिया में शामिल कई महत्वपूर्ण अधिकारी अब स्थानांतरित हो चुके हैं, जिससे साक्ष्यों और फाइलों की कड़ी जोड़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।






