विकास के सिस्टम ने बिगाड़ा नासिक का चेहरा, 160 करोड़ का बजट फिर भी धूल और गड्ढों के साये में नागरिक
Nashik Road Development: नासिक महानगरपालिका ने सड़कों के लिए 160 करोड़ का बजट दिया, लेकिन सिंहस्थ कुंभमेले से पहले शहर की हालत खराब। जानें क्यों 2 साल तक जारी रहेगी खुदाई।
- Written By: गोरक्ष पोफली
नासिक के रास्तों में गड्ढे व चलता मरम्मत का काम (सोर्स: नवभारत)
Nashik Infrastructure Crisis: महाराष्ट्र के उभरते हुए महानगर और आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की मेजबानी की तैयारी कर रहे नासिक शहर की सूरत इन दिनों ‘विकास’ के बोझ तले दबकर बदरंग हो गई है। प्रशासन द्वारा सड़कों के सुधार और नए निर्माण के लिए 160 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित करने के बावजूद, धरातल पर स्थिति शून्य नजर आ रही है। धूल के गुबार, जानलेवा गड्ढे और घंटों का ट्रैफिक जाम अब नासिक की नई पहचान बन गए हैं।
कागजी दावे और जमीनी हकीकत का फासला
महानगरपालिका प्रशासन ने बड़े जोर-शोर से घोषणा की थी कि यूटिलिटी सेवाओं (गैस लाइन, सीवरेज, केबल) के लिए खोदी गई सड़कों को अप्रैल अंत तक दुरुस्त कर लिया जाएगा। लेकिन अब खुद प्रशासन के सुर बदल गए हैं। शहर अभियंता संजय अग्रवाल के बयान से साफ है कि खुदाई के बाद समतलीकरण और फिर डामरीकरण की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि नागरिकों को राहत मिलने में अभी कई महीनों का समय लगेगा। यदि मई अंत तक काम पूरा नहीं हुआ, तो मानसून की पहली फुहार के साथ ही ये सड़कें कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाएंगी और डामरीकरण का काम सीधे अक्टूबर तक टल जाएगा।
‘अमृत’ और अन्य योजनाओं का अंतहीन चक्र
विडंबना यह है कि एक तरफ प्रशासन पुरानी खोदी गई सड़कों को भरने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमृत योजना, OFC वायरिंग और MTNL जैसे कार्यों के लिए नई खुदाई की अनुमति भी दे दी गई है। यह ‘खोदो और भरो’ का अंतहीन सिलसिला नासिककरों के लिए सिरदर्द बन गया है। 28 मुख्य सड़कों को सुधारने का लक्ष्य तो रखा गया है, लेकिन नए गड्ढों की तैयारी ने इस लक्ष्य को संदिग्ध बना दिया है।
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निवेश या बर्बादी?
बजट 2026-27 में सड़कों के लिए 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रशासन का तर्क है कि इससे नए लिंक रोड, बायपास और गड्ढामुक्ति अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, नासिक की जनता इस ‘भारी-भरकम’ फंड को लेकर आशंकित है। पिछले कुछ वर्षों का अनुभव बताता है कि करोड़ों खर्च कर बनाई गई सड़कें पहली ही बारिश में उखड़ जाती हैं। घटिया निर्माण सामग्री और ठेकेदारों की लापरवाही ने जनता के टैक्स के पैसे को पानी में बहाने का काम किया है।
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दो साल तक बना रहेगा ‘खुदाई राज’
सबसे डरावनी हकीकत यह है कि बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर यह खुदाई का दौर अगले 02 साल तक जारी रहने की आशंका है। लिंक रोड और आंतरिक सड़कों की मजबूती के दावों के बीच सवाल यह उठता है कि क्या कुंभमेले के भव्य आयोजन से पहले नासिक सुरक्षित और सुगम हो पाएगा? वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि विकास का यह ‘सिस्टम’ नासिक के स्वरूप को सुधारने के बजाय उसे और अधिक बिगाड़ रहा है।
