अब AI से ट्रैक होगी वन्य जीवों की हलचल, 1000 गांवों में लगेगी अलर्ट प्रणाली
Ganesh Naik News: महाराष्ट्र सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 1000 गांवों में AI आधारित अलर्ट प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Maharashtra AI wildlife alert system (सोर्सः एआय जनरेटेड फोटो-सोशल मीडिया)
Maharashtra AI Wildlife Alert System News: मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अलर्ट प्रणाली को एक हजार गांवों में विस्तारित किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि तकनीक से ही इस संकट का समाधान संभव है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक ने करीब 260 करोड़ रुपए की कार्ययोजना को मंजूरी दे दी। इस प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में दस अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष, दो रेस्क्यू सेंटर और दस उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, राज्य के एक हजार गांवों में एआई-आधारित अलर्ट यंत्रणा लगाई जाएगी, जो वन्य प्राणियों की गतिविधियों की तत्काल जानकारी देगी।
राज्याचे वनमंत्री गणेशजी नाईक यांच्या अध्यक्षतेखाली मंत्रालयात महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडळाच्या स्थायी समितीची १० वी बैठक संपन्न झाली. या महत्त्वपूर्ण बैठकीत विषयसूचीवरील महत्त्वाच्या विकास प्रकल्पांवर सविस्तर चर्चा करण्यात आली. pic.twitter.com/V6Ht8vMlGk — Ganesh Naik Janta Darbar (@ganeshnaikjd) May 26, 2026
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नियंत्रण और रेस्क्यू की त्वरित व्यवस्था
पुलिस नियंत्रण कक्ष की तर्ज पर बनने वाले ये दस कंट्रोल रूम डिजिटल सिस्टम से लैस होंगे, जहाँ से वन विभाग के वाहनों और गस्ती दलों का ट्रैकिंग किया जाएगा। संघर्ष की स्थिति में संबंधितों को तुरंत सचेत किया जा सकेगा। इसके अलावा, 20 स्थानों पर रैपिड रेस्क्यू टीम और दस ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जाएंगे, ताकि घायल या पकड़े गए वन्य प्राणियों का त्वरित उपचार हो सके।
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ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित
वन विभाग ने ग्रामीणों को इस अभियान से जोड़ने का भी निर्णय लिया है। दो हजार प्राथमिक प्रतिसाद दल (प्राइमरी रिस्पॉन्स टीम) बनाए जाएंगे, जिनमें स्थानीय लोगों को शामिल किया जाएगा। ये दल वन्यजीवों के हमले या उपद्रव की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करेंगे। साथ ही, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हिरण, बंदर और जंगली सूअर को पकड़ने के लिए दो मोबाइल टीमें भी बनाई जाएंगी। बंदरों और सूअरों की संख्या नियंत्रण के लिए दो स्थानों पर नसबंदी केंद्र खोलने का भी प्रस्ताव है। वन मंत्री नाईक ने इन सभी उपायों को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मानव जीवन की रक्षा और किसानों की फसल को बचाया जा सके।
