कृषि आपदा का दर्दनाक सच: कर्ज और बेमौसम बारिश ने नासिक संभाग के 382 किसानों की जिंदगी छीनी
Farmer Suicide Cases: जनवरी से नवंबर 2025 के बीच नासिक संभाग में 382 किसान आत्महत्याएं हुईं, जिसका मुख्य कारण प्राकृतिक आपदा और कर्ज का बोझ है। जलगांव सबसे ज्यादा प्रभावित है।
- Written By: आकाश मसने
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Nashik Division Farmer Suicides Report: नासिक संभाग में प्राकृतिक आपदाओं जैसे अतिवृष्टि और बढ़ते कर्ज के बोझ के कारण पिछले जनवरी से नवंबर 2025 के दौरान 382 किसानों ने अपनी जान ले ली है। यह आंकड़ा अत्यंत चौंकाने वाला और सरकारी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।
नासिक संभाग में पिछले 11 महीनों (जनवरी से नवंबर 2025) में 382 किसानों द्वारा अपनी जीवन लीला समाप्त करने का आंकड़ा सामने आया है, जो अत्यंत चिंताजनक है। इन आत्मघाती कदमों के पीछे अतिवृष्टि, बेमौसम बरसात जैसी प्राकृतिक आपदाएं और लगातार बढ़ता कर्ज का बोझ प्रमुख कारण रहे हैं। सरकारी स्तर पर किसानों के लिए विभिन्न योजनाएं चलाए जाने के बावजूद, किसान आत्महत्याओं का यह ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा है, जो सरकारी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती और चिंता का विषय है।
जलगांव सर्वाधिक प्रभावित
संभाग में दर्ज हुई कुल घटनाओं में से लगभग आधी आत्महत्याएं अकेले जलगांव जिले में हुई हैं, जहां 181 मामले दर्ज किए गए। जलगांव के बाद अहिल्यानगर (अहमदनगर) दूसरा सबसे प्रभावित जिला रहा, जहां 101 मामले सामने आए। इसके अतिरिक्त, धुलिया जिले में भी 84 घटनाएं दर्ज की गईं।
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सरकारी स्तर पर आत्महत्याग्रस्त किसानों के परिवारों को मदद दी जाती है। संभाग में अब तक 189 आत्महत्याग्रस्त किसानों के परिवारों को सहायता के लिए पात्र पाया गया है। हालांकि, जिला स्तरीय समिति की जांच प्रक्रिया में 113 किसानों के प्रस्तावों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। वहीं, 80 प्रस्ताव अभी भी जांच प्रक्रिया में लंबित पड़े हुए हैं।
मासिक रुझान और नासिक जिले में मिली राहत
आत्महत्याओं के मासिक रुझानों को देखें तो, जलगांव में जनवरी, फरवरी, मार्च और जुलाई महीनों में यह घटनाएं अधिक हुईं। अहिल्यानगर में यह संख्या जुलाई से नवंबर महीनों में बढ़ी। वहीं, धुलिया जिले में जून और सितंबर में आत्महत्याओं के ग्राफ में तेजी दर्ज की गई थी।
इन तनावपूर्ण आंकड़ों के बीच, नासिक जिले से एक राहत भरी खबर मिली है। पिछले ग्यारह महीनों में नासिक जिले में किसान आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी आई है। इस अवधि में यहां केवल 13 घटनाएं दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का मत है कि बेमौसम संकट के बावजूद, किसानों ने अपना मनोबल नहीं टूटने दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि किसान हित के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने से आपदा के समय किसानों को समय पर मदद मिल सकेगी और आत्महत्याओं के मामलों पर पूरी तरह रोक लग सकती है।
