नासिक जिला अस्पताल में संवेदनशीलता की मिसाल, HIV व हिपेटायटिस पीड़ित गर्भवती माताओं को जीवनदान
Nashik District Hospital: एचआईवी, हिपेटायटिस-बी जैसी संक्रामक बीमारियों से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की जिला अस्पताल नासिक में डॉक्टरों की टीम ने सुरक्षित प्रसूती कराई।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik District Safe Delivery: नासिक समाज में आज भी एचआईव्ही, हिपेटायटिस-बी और सिफलिस जैसी संक्रामक बीमारियों को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है।
ऐसी बीमारियों से पीड़ित गर्भवती माताओं की सुरक्षित प्रसूती कराना चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती और जोखिम भरा कार्य होता है। हालांकि, नासिक जिला अस्पताल के जिला शल्य चिकित्सक डॉ. चारुदत्त शिंदे के मार्गदर्शन में डॉक्टरों की टीम पूरी संवेदनशीलता के साथ इन माताओं को जीवनदान दे रही है। जिला अस्पताल में सामान्य मरीजों के साथ-साथ संक्रामक रोगों वाले मरीजों की संख्या भी काफी अधिक है।
2 साल की उपलब्धियों का प्रभावशाली ग्राफ
अस्पताल द्वारा पिछले दौड साल (1 अप्रैल 2024 से अब तक) में किए गए कार्यों के आंकड़े प्रभावित करने वाले हैं- कुल 12.704 प्रसूती में से 99 माताएं एचआईव्ही बाधित, 156 माताएं हिपेटायटिस-बी बाधित और 40 माताएं सिफलिस से पीड़ित थीं।
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इन सभी की डिलीवरी पूरी तरह सुरक्षित रही। कुल 11,487 मोतियाविंद और काला मोतियाबिंद की सर्जरी हुई, जिनमें 43 मरीज एचआईव्ही या हिपेटायटिस से ग्रसित थे।
समाज द्वारा उपेक्षित 57 से अधिक जेल के कैदियों का हर्निया, फिशर और बवासीर का ऑपरेशन पूरी गोपनीयता और देखभाल के साथ किया गया।
बाधित माता से स्वस्थ बच्चे का जन्मः एक मिशन
ऐसी माताओं की प्रसूती या सर्जरी करते समय डॉक्टरों और नर्सों को खुद संक्रमण होने का बड़ा खतरा रहता है, लेकिन ‘मरीज प्रथम’ के ध्येय के साथ टीम उच्च स्तर की सावधानी बरतते हुए यह कार्य कर रही है-एचआईव्ही बाधित माताओं से बच्चों को संक्रमण न हो, इसके लिए विशेष तकनीक और दवाओं का उपयोग किया जाता है।
हिपेटायटिस-बी बाधित माताओं के बच्चों को जन्म के तुरंत बाद टीकाकरण और ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ देकर उनका भविष्य सुरक्षित किया जाता है।
समय पर दवाएं और टीकाकरण जरूरी
- बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश गोरे के अनुसार, संक्रमित माता से जन्म लेने वाले बच्चे को बचाना उनके लिए ‘गोल्डन अवर’ (अत्यंत महत्वपूर्ण समय) होता है।
- जन्म के पहले कुछ घंटों में सही निवारक दवाएं और टीकाकरण देना अनिवार्य है।
जब ऐसे बच्चों की रिपोर्ट’ नेगेटिव’ आती है। तो वह क्षण पूरी मेडिकल टीम के लिए गर्व और संतुष्टि का होता है।
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- नासिक जिला अस्पताल न केवल जिले में बल्कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवा और मानवीय दृष्टिकोण का एक आदर्श उदाहरण बन गया है।
- यहाँ मरीजों की गोपनीयता का पूरा सम्मान किया जाता है और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए उन्हें सम्मानजनक उपचार दिया जाता है।
