नासिक में CCTV सख्ती, ट्रैफिक पार्क पुराना विवाद गरमाया; यातायात जागरूकता के दावे, कानूनी प्रक्रिया पर प्रश्न
Nashik Traffic System: नासिक में सिग्नलों पर सीसीटीवी लागू होने के बीच महासभा में चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क की जमीन के कथित अवैध उपयोग और समाप्त अनुबंध का मुद्दा गरमाया।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Municipal Corporation Debate ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Corporation Debate: नासिक शहर की यातायात व्यवस्था को अनुशासित करने के लिए सिग्नलों पर सीसीटीवी कैमरे सक्रिय कर दिए गए हैं। यह महज एक संयोग है कि जिस दिन पुलिस ने इन कैमरों का प्रत्यक्ष कार्यान्वयन शुरू किया, उसी दिन मनपा को महासभा में चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क की जमीन के इस्तेमाल को लेकर गरमागरम चर्चा हुई, वरिष्ठ पार्षद हेमलता पाटिल ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए बताया कि चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क को वर्ष 2013 से 2018 तक 5 साल के अनुबंध पर दिया गया था।
अनुबंध की अवधि समाप्त हुए 8 साल बीत चुके हैं, लेकिन आरोप है कि आज भी इस जगह का अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा है। इसका तात्पर्य यह है कि पिछले कई वर्षों से इस पार्क के माध्यम से स्कूली बच्चों और युवाओं को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने के दावे तो किए गए, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
अनुशासन के दावों की खुली पोल एक तरफ ट्रैफिक पार्क के जरिए शहर को अनुशासित बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा सीसीटीवी कैमरों के जरिए की गई केवल एक सप्ताह की निगरानी में ही शहर के लगभग ढाई लाख वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करते पाए गए।
सम्बंधित ख़बरें
यह लगातार प्रताड़ना का मामला…महिला के ऑनलाइन उत्पीड़न पर कोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार
यह जबरन थोपने जैसा… वंदे मातरम पहले गाने के फैसले पर भड़का विपक्ष, सुधीर मुनगंटीवार का पलटवार
स्वच्छ शहर के लिए मनपा का एक्शन मोड, अमोल येडगे का छत्रपति संभाजीनगर मॉडल चर्चा में, वसूला 1 लाख का जुर्माना
मेयर रितु तावड़े के आदेश के बावजूद बोलते रहे नवनाथ बन, मुंबई मनपा की विशेष सभा में जमकर बवाल
इन चौकाने वाले आंकड़ों ने ट्रैफिक पार्क की आवश्यकता और उसकी सफलता पर बड़े प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। मनपा प्रशासन ने इस पार्क की ओर अब तक ध्यान क्यों नहीं दिया, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।
जिस बड़े पैमाने पर शहर में नियम तोड़े जा रहे हैं, उसे देखते हुए पार्क के संचालकों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है कि क्या वे अपने वास्तविक उद्देश्य में सफल हो पाए हैं। इस पूरे प्रकरण ने शहर में यातायात अनुशासन के नाम पर होने वाली गतिविधियों की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।
विवाद के मुख्य बिंदु
अनुबंध अवधि: 2013-2018 (वर्तमान में समाप्त), प्रमुख आरोप अनुबंध खत्म होने के 8 साल बाद भी अवैध कब्जा और व्यावसायिक उपयोग।
यह भी पढ़ें:-गर्मी का असर: पानशेत-सिंहगड़ में जलस्रोत सूखे, भोजन संकट गहराया; वन्यजीव गांवों की ओर
सदन में मुद्दाः वरिष्ठ पार्षद हेमलता पाटिल द्वारा उठाया गया।
विरोधाभासः पार्क की मौजूदगी के बावजूद शहर में यातायात उल्लंघन के आंकड़े बेहद ऊंचे।
