नासिक में बोस-बालासाहेब जयंती पर देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम, स्वाभिमान और संघर्ष का संदेश

Nashik Event: नासिक में नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बालासाहेब ठाकरे की जयंती पर भव्य कार्यक्रम हुआ, जिसमें युवाओं में देशभक्ति, स्वाभिमान और संघर्ष की भावना जागृत करने का संकल्प लिया गया।
A patriotic program held in Nashik on the occasion of Bose-Balasaheb Jayanti conveyed a message of self-respect and struggle.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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23rd January Birth Anniversary Events: नासिक देशभक्ति, स्वाभिमान और संघर्ष की ज्वाला युवाओं के मन में प्रज्वलित करने वाले दो महान व्यक्तित्वों-नेताजी सुभाषचंद्र बोस तथा हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की जयंती के अवसर पर आज हिंदू जनसंपर्क कार्यालय में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर दोनों महापुरुषों को भावपूर्ण श्रद्धांजली अर्पित करते हुए उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया।

'आजाद हिंद' की हुंकार, और 'हिंदुत्व' का विचार !

समारोह के दौरान वक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के ओजस्वी जीवन पर प्रकाश डाला। स्वतंत्रता के लिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा किया गया त्याग और उनका साहसी नेतृत्व आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। हिंदुत्व की विचारधारा को एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप देने वाले बालासाहेब ठाकरे के स्पष्ट चिचार आज भी अन्याय के विरुद्ध खड़े रहने का साहस प्रदान करते हैं। उपस्थित जनों ने कहा कि नेताजी की राष्ट्र‌निष्ठा और बालासाहेब ठाकरे का संघर्ष आज की पीढ़ी के लिए दीपस्तंभ के समान है।

धारकरियों का प्रस्थान

इस अवसर पर विशेष रूप से महकोट अभियान' के लिए प्रस्थान कर रहे शिवसैनिकों और धारकरियों का अभिनंदन किया गया, ऐतिहासिक किलो के सरक्षण और युवाओं में इतिहास के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से सागर देशमुख, अमोल गुणवंत, मकरंद कुलकर्णी, गणेश राऊत (राऊत), नानासाहेब आढाव, धिरज जोशी, सुमित ठाकरे, निलेश सानप और नाना दहगव्हाळ सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक इस अभियान के लिए खाना हुए।

अभिवादन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में सामाजिक वेतना और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना या। युवाओं का आह्वान किया गया कि वे महापुरुषों के समर्पित जीवन को आत्मसात कर समाज सेवा का कार्य करें। किलों और गढ़ों के संरक्षण को केवल पर्यटन नहीं बल्कि अपनी पहचान और इतिहास को जीवित रखने का माध्यम बताया गयाय।

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