गिरीश महाजन को HC से राहत, जबरन वसूली मामले की जांच CBI को सौंपने की याचिका खारिज, हो चुकी है क्लोजर रिपोर्ट दाखिल
हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री गिरीश महाजन के खिलाफ जबरन वसूली मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
मंत्री गिरीश महाजन को HC से राहत (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नासिक: हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री गिरीश महाजन के खिलाफ जबरन वसूली मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया है। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और नीला गोखले की पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को निचली अदालत में जाने का निर्देश दिया, क्योंकि सीबीआई ने 2023 में मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है।
यह याचिका जलगांव जिला मराठा विद्या प्रसारक सहकारी समाज नामक शैक्षणिक संस्था के निदेशक विजय भास्करराव पाटिल ने दायर की थी। 2020 में गिरीश महाजन और 28 अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और मकोका अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जलगांव के निंभोरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज
इस अपराध से जुड़े मामले में याचिका दायर की गई थी। पाटिल ने 2020 में अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि महाजन ने उन्हें शिक्षण संस्थान बेचने के लिए मजबूर किया। इस मामले में शुरुआत में जलगांव के निंभोरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में उस अपराध की जांच पुणे के कोथरुड पुलिस स्टेशन को सौंप दी गई।
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क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हो चुकि है
पाटिल ने आरोप लगाया था कि उस जगह पर जबरन वसूली, अपहरण, चोरी आदि की घटनाएं हुई थीं। 22 जुलाई 2022 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले गृह विभाग ने महाजन के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। हालांकि, सीबीआई ने 23 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए मामला बंद कर दिया कि महाजन के खिलाफ मामला साबित नहीं हो सका।
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मामले को सीबीआई को सौंपने का फैसला अवैध
इस बीच, पाटिल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि मामले को सीबीआई को सौंपने का सरकार का फैसला अवैध, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका में आगे विचार करने के लिए कुछ भी नहीं बचा है और याचिका का निपटारा कर दिया।
इस प्रकार है मामला
दिसंबर 2020 में जलगांव के निंभोरा पुलिस स्टेशन में महाजन और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। विजय पाटिल मराठा विद्या प्रसार सहकारी समाज के निदेशकों में से एक हैं। पाटिल ने आरोप लगाया है कि उन पर साल 2018 में इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया गया। साथ ही संगठन में कथित रूप से तोड़फोड़ की गई। कथित अपराध का मामला जनवरी 2018 से जनवरी 2021 के बीच का है।
