मालेगांव: सरकारी जमीन पर लगे मोबाइल टावर का किराया 20 साल से डकार रहा था निजी व्यक्ति, RTI में बड़ा खुलासा
Maharashtra Tower Scam News: मालेगांव के मौज टोकड़े गांव में RTI से बड़ा खुलासा। ग्राम पंचायत की जमीन पर लगे मोबाइल टावर का किराया पिछले 20 वर्षों से एक निजी व्यक्ति द्वारा डकारने का मामला आया सामने।
- Written By: रूपम सिंह
मोबाइल टावर सोर्स: सोशल मीडिया
Malegaon Mauj Tokde Mobile Mobile Tower Scam: मालेगांव तहसील के ‘मौज टोकड़े’ गांव में मोबाइल टावर से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारियों से यह खुलासा हुआ है कि ग्राम पंचायत की मालिकाना हक वाली जमीन पर लगे मोबाइल टावर का किराया पिछले दो दशकों से कोई निजी व्यक्ति डकार रहा था। सामाजिक कार्यकर्ता विजयसिंह भूरा डिंगर ने आरटीआई के जरिए ग्राम पंचायत टोकड़े और पटवारी कार्यालय से दस्तावेज निकालकर इस बड़े फर्जीवाड़े को उजागर किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता विजय सिंह डिंगर द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में भारी अनियमितता और वित्तीय हेरफेर के पुख्ता सबूत मिले हैं। पटवारी कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक ऋण पत्रिका के अनुसार, जिस जमीन पर मोबाइल टावर खड़ा है, उसके मालिकाना हक के कॉलम में साफ तौर पर ग्राम पंचायत कार्यालय टोकड़े दर्ज है। वैध कानूनी समझौता रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है।
विभागीय आयुक्त और जिलाधिकारी से शिकायत
इस खुलासे के बाद यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि यदि जमीन सरकारी थी, तो पिछले 20 साल से मोबाइल टावर का लाखों रुपये किराया किस आधार पर और किसकी जेब में जा रहा था? सरकारी खजाने को चूना लगाकर इस राशि का निजीकरण किए जाने का संदेह है।
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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता विजय सिंह डिंगर ने विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर जिला अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी, मालेगांव तहसीलदार और गुट विकास अधिकारी समेत टोकड़े ग्राम पंचायत को लिखित शिकायत सौंपी है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की जाए। तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारियों, पदाधिकारियों, राजस्व कर्मचारियों (पटवारी) और संबंधित निजी व्यक्ति की भूमिका की जांच हो। सरकारी दस्तावेजों में अवैध फेरबदल करने और सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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टावर लगाते समय ग्राम सभा की नहीं ली गई मंजूरी
इसके विपरीत, जब ग्राम पंचायत के संपत्ति रजिस्टर (नमुना नंबर 8) की जांच की गई, तो उसमे मालिकाना हक के स्थान पर विजय सिंह पंडित सिंधु नामक एक निजी व्यक्ति का नाम दर्ज पाया गया। ग्राम पंचायत ने लिखित में स्वीकार किया है कि इस मोबाइल टावर को लगाने के लिए ग्राम पंचायत का कोई आधिकारिक प्रस्ताव, ग्राम सभा की मंजूरी, अनापत्ति प्रमाण पत्र या संबंधित कंपनी और जमीन मालिक के बीच हुआ कोई भी वैध कानूनी समझौता रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है।
