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20 जिला परिषदों के चुनाव पर सस्पेंस बरकरार, ओबीसी आरक्षण सीमा विवाद बना बड़ी बाधा

OBC Reservation Limit: ओबीसी आरक्षण सीमा विवाद के चलते महाराष्ट्र की 20 जिला परिषदों के चुनाव अधर में हैं, जिनका फैसला 23 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

  • Written By: आंचल लोखंडे
Updated On: Feb 10, 2026 | 06:56 PM

local body elections Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Maharashtra Zilla Parishad Elections: महाराष्ट्र की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावी नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन शेष 20 जिला परिषदों के चुनावों को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। जिन जिला परिषदों में आरक्षण का प्रतिशत 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक हो गया है, उनका भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर निर्भर है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की गई है।

मार्च के अंत में चुनाव के आसार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय से राज्य चुनाव आयोग को हरी झंडी मिलती है, तो 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद मार्च के अंत या अप्रैल महीने में इन जिला परिषदों के चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, यदि निर्णय नहीं आता या सुनवाई आगे बढ़ती है, तो चुनाव सीधे दिवाली के बाद तक टलने की संभावना जताई जा रही है। इस अनिश्चितता के चलते संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

आरक्षण सीमा बनी सबसे बड़ी बाधा

हाल ही में रायगढ़, पुणे, कोल्हापुर और छत्रपति संभाजीनगर जिला परिषदों के चुनाव संपन्न हुए, जहां महायुति को स्पष्ट जनादेश मिला। इसके विपरीत शेष 20 जिलों में ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से काफी अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नंदुरबार में आरक्षण 100 प्रतिशत, पालघर में 93 प्रतिशत, नाशिक में 71 प्रतिशत और धुले में 73 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

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23 फरवरी की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर टिकी नजरें

अहिल्यानगर जिले में कुल आरक्षण 49 प्रतिशत होने के बावजूद अकोले और श्रीरामपुर पंचायत समितियों में यह सीमा 50 प्रतिशत से अधिक है। इन्हीं तकनीकी और संवैधानिक कारणों से नाशिक सहित इन जिलों को पहले चरण के चुनावों में शामिल नहीं किया गया था।

ये भी पढ़े: छत्रपति संभाजीनगर: जेल की ढिलाई या साजिश? खुली जेल से उम्रकैदी फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

23 फरवरी होगी निर्णायक तारीख

ओबीसी आरक्षण से संबंधित याचिका पर पहले 21 जनवरी को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन मामला सूचीबद्ध नहीं हो सका। अब सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी की तारीख तय की है। यदि उस दिन राज्य चुनाव आयोग को चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश नहीं मिलते या सुनवाई आगे टलती है, तो इस गर्मी में भी चुनाव होना मुश्किल माना जा रहा है।

Maharashtra zilla parishad elections obc reservation case

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Published On: Feb 10, 2026 | 06:56 PM

Topics:  

  • Maharashtra
  • Maharashtra Local Body Elections
  • Nashik News
  • OBC Quota
  • Supreme Court

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