लू से बेहाल नासिक: 43°C में तपते हालात, किसानों ने ‘फॉगर तकनीक’ से बचाईं गायें और बढ़ाया दूध उत्पादन
Lasalgaon Dairy Farming: लासलगांव में भीषण गर्मी से दुग्ध उत्पादन प्रभावित। किसानों ने गौशाला में फॉगर तकनीक अपनाकर गायों को राहत दी और उत्पादन में सुधार की कोशिश की।
- Written By: अंकिता पटेल
गौशाला प्रबंधन, हीटवेव असर, (प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Lasalgaon Heatwave: लासलगांव नाशिक जिले सहित पूरे महाराष्ट्र में भीषण लू का प्रकोप जारी है, जिससे अधिकतम तापमान का पारा दिन-प्रतिदिन नई ऊंचाइयां छू रहा है। उत्तर महाराष्ट्र के ठंडे इलाकों में शुमार निफाड तहसील में भी इस साल गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। 13 अप्रैल से यहां तापमान लगातार 40 डिग्री के ऊपर बना हुआ है।
सोमवार को पारा 43 तक पहुंच गया था, जबकि बुधवार को भी तापमान 41 डिग्री दर्ज किया गया थी। इस भीषण गर्मी का सीधा असर न केवल आम जनजीवन पर, बल्कि मूक पशुओं पर भी पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण दुग्ध व्यवसाय के प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। लासलगांव के किसान प्रमोद पाटिल और महेंद्र पाटिल की गौशाला में गायों का स्वास्थ्य गर्मी के चलते बिगड़ने लगा था।
लगातार बढ़ते तापमान से गायें बेचैन हो रही थीं और उनके दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट दर्ज की गई थी। गौशाला की गर्मी कम करने के लिए इन किसान भाइयों ने एक प्रभावी तकनीक का सहारा लिया। प्रमोद पाटिल ने करीब 7 हजार रुपये की लागत से अपनी गौशाला में 16 फॉगर (स्प्रे) लगवार।
सम्बंधित ख़बरें
महाराष्ट्र दिवस पर धुले के सीनियर PI श्रीराम पवार को ‘DGP सम्मानचिन्ह’, सख्त कार्यशैली से बनाई अलग पहचान
धुले के ‘पांच कंदील’ क्षेत्र का बदलेगा चेहरा: 55 करोड़ से बनेगा आधुनिक मार्केट, अतिक्रमणमुक्त शहर की ओर कदम
Ratnagiri Education Department पर संकट: रत्नागिरी में प्रमुख पद रिक्त, नीतिगत फैसलों में आ रही देर
Nashik District Hospital में आधुनिक बर्न वार्ड का उद्घाटन, गंभीर मरीजों को मिलेगी बेहतर सुविधा
पशुओं के लिए ‘एसी’ की ठंडक
इन फॉगर्स के माध्यम से पानी की सूक्ष्म फुहारें छोड़ी जाती है। जिससे गौशाला के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से गौशाला में दंडक पैदा हुई है और गायों की सेहत में भी काफी सुधार आया है किसान महेंद्र पाटिल ने जानकारी दी कि फॉगर सिस्टम शुरू होने के बाद से गायों का तनाव कम हुआ है और उनके खान-पान में भी सुधार हुआ है।
यह भी पढ़ें:-महाराष्ट्र दिवस पर धुले के सीनियर PI श्रीराम पवार को ‘DGP सम्मानचिन्ह’, सख्त कार्यशैली से बनाई अलग पहचान
इसका सकारात्मक असर दूध उत्पादन पर पड़ा है और उत्पादन में पहले की तुलना में बढ़ोतरी हुई है, लासलगांव के इन दोनों भाइयों द्वारा किया गया यह कम लागत वाला प्रयोग वर्तमान में पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बदलते मौसम की चुनौतियों के बीच कृषि और पशुपालन व्यवसाय को बचाने के लिए इस तरह के उपाय समय की भाग बन गए है। यह प्रयोग क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए भी एक मार्गदर्शक मिसाल पेश कर रहा है।
