कुंभमेला 2027: नासिक-त्र्यंबकेश्वर में लगेंगे 51 फीट ऊंचे ध्वजस्तंभ, समुद्र मंथन के प्रतीकों से सजेंगे स्तंभ
Kumbh Preparations: कुंभमेला 2027 की तैयारियों के तहत नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में 51 फीट ऊंचे ध्वजस्तंभ स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें समुद्र मंथन के प्रतीकों से सजाया जाएगा और जिनकी समीक्षा कुंभमेला प्राधिक
- Written By: आंचल लोखंडे
dhvajstambh installation (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Trimbakeshwar: आगामी नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेला 2027 की तैयारियों के क्रम में ध्वजस्तंभों और पताकाओं की स्थापना को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। स्मार्ट सिटी मिशन कार्यालय में हुई इस बैठक की अध्यक्षता नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने की। बैठक में ध्वजस्तंभों की स्थापत्य संरचना, सामग्री, ऊंचाई और धार्मिक प्रतीकों के नियोजन पर विस्तृत चर्चा की गई।
श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
आयुक्त शेखर सिंह ने स्पष्ट किया कि ये ध्वजस्तंभ केवल भौतिक संरचनाएं नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। इसलिए, इनकी स्थापना पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ की जानी चाहिए। नाशिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों स्थानों पर एकरूपता बनी रहे, इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थापत्य कला और ऊंचाई के मानक
लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्तुत योजना के अनुसार, ध्वजस्तंभों की ऊंचाई 51 फीट और 31 फीट निर्धारित की गई है। इनकी नींव क्रमशः 1 फीट और 8 इंच त्रिज्या की होगी। स्तंभों को मजबूत और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ उन पर पौराणिक महत्व से जुड़े प्रतीकों को उकेरा जाएगा। विशेष रूप से समुद्र मंथन से संबंधित कलाकृतियों को इन स्तंभों पर स्थान दिया जाएगा।
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पुरोहित संघों का आध्यात्मिक परामर्श
बैठक में नासिक और त्र्यंबकेश्वर के पुरोहित संघों ने आध्यात्मिक और धार्मिक रचनाओं से संबंधित सुझाव दिए। यह निर्णय लिया गया कि लोक निर्माण विभाग इन पुरोहित संघों से चर्चा कर अंतिम डिजाइन तैयार करेगा। साथ ही, पताकाओं की रूपरेखा भी संबंधित पुरोहित संघों द्वारा ही तैयार की जाएगी।
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प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति
इस उच्च-स्तरीय बैठक में नासिक नगर निगम की आयुक्त मनीषा खत्री, शहर अभियंता संजय अग्रवाल, लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता राहुल के. पाटिल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, शिल्पकार प्रमोद कांबले और दोनों पुरोहित संघों के अध्यक्ष व पदाधिकारी उपस्थित थे।
