
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
Nashik Administration: नासिक में आयोजित भारतीय वायुसेना के एयर शो के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रवेश शुल्क वसूले जाने के मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया है। इस संबंध में भारतीय वायुसेनाने सोशल मीडिया पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि वायुसेना अपने किसी भी एयर शो के लिए दर्शकों से प्रवेश शुल्क नहीं लेती।
एयर शो देखने के लिए आम नागरिकों से 200 से 800 रुपये तक का शुल्क लिया गया, जबकि वीआईपी को मुफ्त पास दिए गए, जिससे विवाद और गहरा गया है। सोशल मीडिया पर चचर्चा तेज होने के बाद भारतीय वायुसेना ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
वायुसेना ने अपनी पोस्ट में कहा कि उसके एयर शो देशभर के युवाओं को सेना के प्रति प्रेरित करने और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए होते हैं, न कि आर्थिक लाभ के लिए, आईएएफ ने स्पष्ट किया कि नासिक में शुल्क लिए जाने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है, लेकिन वायुसेना ऐसे किसी भी शुल्क को अपनी मंजूरी नहीं देती।
वायुसेना के स्पष्टीकरण के बाद अब जिला प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है। चर्चा है कि यह शुल्क कार्यक्रम स्थल पर विशेष व्यवस्था, वीआईपी गैलरी और पार्किंग सुविधाओं के नाम पर लिया गया है।
बताया जा रहा है कि एकत्रित की गई शेष राशि ‘महाराष्ट्र सैनिक कल्याण विभाग’ को हस्तांतरित की जाएगी, हालांकि, नागरिकों का कहना है कि राष्ट्रीय गौरव के कार्यक्रम में इस तरह के शुल्क की जानकारी पहले सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? आमतौर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित सार्वजनिक प्रदर्शन मुफ्त होते हैं।
यदि स्थानीय प्रशासन भीड़ नियंत्रण या बैठने की व्यवस्था के लिए कोई शुल्क लगाता है, तो उसके लिए उचित वैधानिक अनुमति और पूर्व सूचना अनिवार्य है। इस मामले में वायुसेना के ‘नो-प्रॉफिट’ रुख ने प्रशासन को असहज स्थिति में डाल दिया है।
इस विवाद ने आम नागरिकों और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। आम जनता से पैसे वसूलना और प्रभावाशाली लोगों को मुफ्त पास देना सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का विषय बना हुआ है।
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नागरिकों ने मांग की है कि टिकटों से जमा की गई कुल राशि और उसके उपयोग का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए, कई लोगों का कहना है कि जी बची सेना को करीब से देखना चाहते थे, उनके लिए शुल्या एक बाधा बन गया






