नासिक में रेत माफिया पर वन विभाग का छापा, गोदावरी-कादवा संगम से जब्त हुआ अवैध स्टॉक
Nashik News: नासिक में नांदूर मधमेश्वर अभयारण्य के गोदावरी-कादवा संगम क्षेत्र में वन विभाग ने आधी रात छापा मारकर अवैध रेत तस्करी का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बड़ी मात्रा में बालू जब्त की है।
- Written By: सोनाली चावरे
रेत माफिया पर वन विभाग की कार्रवाई (pic credit; social media)
Forest Department Raids Sand Mafia: विश्व प्रसिद्ध रामसर दर्जा प्राप्त नांदूर मधमेश्वर वन्यजीव अभयारण्य एक बार फिर अवैध रेत तस्करी की चपेट में आ गया। लेकिन इस बार रेत माफिया की किस्मत ने साथ नहीं दिया। वन विभाग ने आधी रात को गोदावरी और कादवा नदी के संगम क्षेत्र में धावा बोलते हुए अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, वन विभाग को शनिवार देर रात गुप्त सूचना मिली कि संगम क्षेत्र में रेत माफिया चोरी-छिपे नदी से बालू निकाल रहे हैं। जैसे ही खबर मिली, उप वन संरक्षक कृष्णा भवर और वन परिक्षेत्र अधिकारी हीरालाल चौधरी के नेतृत्व में टीम ने बिना समय गंवाए मौके पर धावा बोला।
कार्रवाई इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि टीम को रात के अंधेरे में पानी में उतरकर छापा मारना पड़ा। मौके से रेत निकालने के लिए इस्तेमाल हो रहे तीन लोहे के ‘केनी’ (खनन उपकरण), रस्सी और बड़ी मात्रा में संग्रहीत रेत जब्त की गई। हालांकि, तस्करों को जैसे ही भनक लगी, वे अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ भागने में कामयाब हो गए।
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वनपाल रूपेशकुमार दुसाने और वनरक्षक कैलाश सदगीर की टीम ने बहादुरी दिखाते हुए मौके पर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। वन विभाग ने इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज किया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
वन अधिकारी हीरालाल चौधरी ने बताया कि इस अवैध रेत खनन से अभयारण्य के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर खतरा है। “रेत की तस्करी से न केवल नदी की धारा प्रभावित होती है, बल्कि पक्षियों के आश्रय स्थल और घोंसले भी नष्ट हो रहे हैं। यह प्रकृति के साथ सीधा खिलवाड़ है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसे अपराधों की सूचना तुरंत विभाग को दें। “सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा,” चौधरी ने आश्वासन दिया।
इस कार्रवाई को पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। वन विभाग की यह आधी रात की कार्रवाई न केवल अवैध रेत माफिया के खिलाफ कड़ा संदेश है, बल्कि यह भी साबित करती है कि प्रशासन अब पर्यावरण अपराधों पर आंखें मूंदकर नहीं बैठेगा।
