CIDCO Violence:सिडको में महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ambad Police Case: सिडको महानगरपालिका चुनाव के महज दो दिन बाद ही कामटवाड़ा परिसर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। चार से पांच मनचलों ने यह कहते हुए कि “हम नवनिर्वाचित पार्षद मुकेश शहाणे और विनोद मगर के लोग हैं, हमने हत्या भी की है, हमें किसी का डर नहीं,” खुलेआम दहशत फैलाई और नागरिकों के साथ बेरहमी से मारपीट की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चुनाव संपन्न हुए अभी दो दिन ही हुए थे कि इन गुंडों ने कामटवाड़ा परिसर में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। कुछ नागरिकों के साथ मारपीट की जा रही थी, तभी उसी मार्ग से गुजर रहे एक दंपती ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया। इससे आक्रोशित मनचलों ने उसी दंपती को निशाना बनाते हुए दोनों के साथ अमानवीय मारपीट की।
मारपीट के दौरान एक व्यक्ति को बेरहमी से पीटा जा रहा था। उसकी पत्नी जब “मारो मत” कहते हुए उसे बचाने आगे आई, तो आरोपियों ने महिला को भी लात-घूंसों से पीटा और उसके सीने व पेट पर वार किए। झड़प के दौरान महिला की ओढ़नी खींचकर उसके साथ छेड़छाड़ किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप कर मारपीट को रोका। इसके बाद बड़ी संख्या में नागरिक अंबड पुलिस थाने पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी। इस घटना में संबंधित महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की जानकारी देते हुए आशुतोष रविंद्र कटारे ने बताया, “ये मनचले हर दो-तीन महीने में इलाके में आकर दहशत फैलाते हैं और नागरिकों को परेशान करते हैं।” वहीं, झगड़े और मारपीट के दौरान अमोल पाटील और उसके साथियों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप आशुतोष कटारे की पत्नी ने लगाया है। पुलिस ने इस मामले में अपराध दर्ज कर लिया है और आगे की जांच अंबड पुलिस कर रही है। चुनाव के बाद इस तरह खुलेआम गुंडागर्दी की घटनाओं से नागरिकों में भय और असंतोष का माहौल बन गया है।
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इस घटना के मानसिक आघात का असर इतना गहरा था कि अगले दिन दोपहर करीब दो बजे त्रिमूर्ति चौक परिसर में एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। मारपीट में घायल व्यक्ति की मां ने गुस्से और मानसिक तनाव में आत्मदाह करने का प्रयास किया। उसने अपने शरीर पर केरोसिन डाल लिया था, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और सतर्क स्थानीय नागरिकों ने समय रहते हस्तक्षेप कर एक बड़ा हादसा टाल दिया।
इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव के कुछ ही दिनों के भीतर नागरिकों को सड़कों पर असुरक्षित महसूस होने लगा है। गुस्साए नागरिकों ने दोषियों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई कर कामटवाड़ा परिसर में कानून का डर दोबारा स्थापित करने की जोरदार मांग की है।