नासिक मनपा को बड़ा झटका, 176 करोड़ के सफाई ठेके पर ब्रेक: बॉम्बे हाई कोर्ट
Bombay High Court Stay: नाशिक मनपा के 176 करोड़ के सफाई ठेके पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्थगन आदेश दिया है। अदालत ने स्थानीय ठेकेदारों को समान अवसर देने और बिना अनुमति अंतिम निर्णय न लेने का निर्देश दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Cleaning Contract: नासिक बॉम्बे हाई कोर्ट ने नासिक महानगरपालिका द्वारा प्रस्तावित 176 करोड़ रुपये के विशाल सफाई ठेके पर स्थगन आदेश (स्टे) लगा दिया है। यह नगर निकाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में स्थानीय ठेकेदारों को भी समान अवसर दिया जाए और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना इस पर कोई अंतिम निर्णय न लिया जाए।
मनपा ने शहर की सड़कों की सफाई के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से करीब 800 कर्मचारियों की नियुक्ति का 5 साल का प्लान बनाया था। आरोप है कि निगम ने केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हुए निविदा में ऐसी ‘अनावश्यक’ शर्ते जोड़ी थीं, जिससे स्थानीय ठेकेदार बाहर हो जाएं।
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कोर्ट रूम में क्या हुआ?
चर्चा है कि यह पूरी बिसात कुछ चुनिदा बड़े ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए बिछाई गई थी। इन भेदभावपूर्ण शर्तों के खिलाफ वॉटर ग्रेस कंपनी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति चांदूरकर और न्यायमूर्ति साठे की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। ‘बॉटर ग्रेस’ की ओर से अधिवक्ता अस्पी चिनॉय ने पक्ष रखा।
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मनपा के वकीलों ने कर्मचारियों की ‘तत्काल आवश्यकता’ का तर्क देकर रोक हटाने की विनती की, जिसे उच्च न्यायालय ने सिरे से खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त आयुक्त स्मिता झगड़े भी कोर्ट में मौजूद थीं, अदालत के कड़े रुख के बाद अब मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
