
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Election Violence: नासिक महानगरपालिका चुनाव के नतीजों ने जहां एक ओर भाजपा खेमे में जश्न का माहौल पैदा किया है, वहीं दूसरी ओर शहर के कुछ हिस्सों में राजनीतिक रंजिश हिंसा में बदल गई है। नासिकरोड और भद्रकाली क्षेत्रों में पराजित उम्मीदवारों के समर्थकों और विजेताओं के बीच हुई झड़पों ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
प्रभाग 18 में तो नवनिर्वाचित पार्षद पर जानलेवा हमले की कोशिश तक की गई। प्रभाग क्रमांक 18 से भाजपा की टिकट पर जीत हासिल करने वाले शरद मोरे पर हमले की सनसनीखेज घटना सामने आई है। शरद मोरे का आरोप है कि पराजित उम्मीदवार के समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की और थप्पड़ मारे। मोरे ने दावा किया कि हमले के लिए आए एक युवक की कमर में बंदूक लगी थी।
हालांकि, वहां मौजूद महिलाओं ने साहस दिखाते हुए हमलावर युवक को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। शरद मोरे के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड में फरार पवन पवार की माता इस प्रभाग से चुनाव लड़ रही थीं।
उनकी हार से तिलमिलाए पवन के समर्थकों ने ही इस हमले को अंजाम दिया है। घटना के बाद भाजपा नेता आचार्य तुषार भोसले ने मोरे से मुलाकात कर सुरक्षा की मांग की है।
तनाव की एक और चिंगारी प्रभाग क्रमांक 13 के सोमवार पेठ इलाके में भड़की। यहां शिवसेना के पराजित उम्मीदवार गणेश मोरे के घर के बाहर कुछ अज्ञात युवकों ने पटाखे फोड़कर अभद्र नारेबाजी की।
इस बात को लेकर दोनों गुटों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, भद्रकाली पुलिस ने गणेश मोरे की शिकायत पर मामला दर्ज किया है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।
चुनावी नतीजों के बाद बिगड़ते माहौल को देखते हुए नासिक पुलिस कमिश्नर ने सख्त निर्देश जारी किए है। प्रभाग 13, 18 और पुराने नासिक के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियां तैनात की गई है।
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पुलिस ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे विजय जुलूस के दौरान भड़काऊ नारेबाजी और दूसरे गुटों के घरों के सामने पटाखे फोड़ने से बचें।
भारतीय जनता पार्टी ने 72 सीटें जीतकर 62 के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है और अपनी सत्ता सुरक्षित कर ली है। लेकिन एकशिंदे सेना (26 सीटें) और ठाकरे गुट (15 सीटें) के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब सड़कों पर नजर आने लगी है। स्थानीय प्रशासन के लिए आगामी कुछ दिन शहर में शांति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।






