शालार्थ ID घोटाला: 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल, SIT का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन, 1100 संशयित घेरे में
SIT Report On Shalarth Id Scam: नासिक के शालार्थ आईडी घोटाले में SIT ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। 1100 संशयित जांच के घेरे में, 150 करोड़ रुपये के गबन का अनुमान।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
शालार्थ ID घोटाला (सोर्स:AI)
SIT Report On Shalarth Id Scam In Nashik: शिक्षा क्षेत्र को कलंकित करने वाले नासिक विभागीय शिक्षा कार्यालय के बहुचर्चित शालार्थ आईडी घोटाले में विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। करोड़ों रुपये का चूना लगाकर सरकार के साथ धोखाधड़ी करने वाले करीब 1100 संशयितों के खिलाफ सबूत जुटाते हुए SIT ने नासिक रोड अतिरिक्त सत्र न्यायालय में 11 हजार पन्नों का प्राथमिक दोषारोपपत्र दाखिल किया है।
यह सिर्फ एक तकनीकी अपराध नहीं है
इस कार्रवाई की खास बात यह है कि फर्जी आईडी के दम पर सरकारी खजाने से हर महीने नियमित वेतन उठाने वाले शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी भी अब सीधे जांच के घेरे में आ गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की पहली सुनवाई शुक्रवार 3 जुलाई को होगी।
मार्च 2026 में दर्ज मामले के अनुसार, यह रैकेट मार्च 2019 से जून 2025 के बीच नासिक, धुलिया, नंदुरबार और जलगांव जिलों में सक्रिय था, जिससे सरकारी खजाने को करीब 150 करोड़ रुपये का चूना लगने का अनुमान है।
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न्यायालय ने भी इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह सिर्फ एक तकनीकी अपराध नहीं है, बल्कि बच्चों की शिक्षा के लिए आवंटित सार्वजनिक धन की सुनियोजित लूट है, जिससे पात्र और ईमानदार शिक्षकों के हक मारे गए हैं।
वेतन डकारने वाले रडार पर
बैक डेटेड (पिछली तारीख के) आदेश दिखाकर जिन 841 कर्मियों ने बोगस शालार्थ आईडी हासिल की, वे सभी SIT के शिकंजे में हैं। अवैध रूप से वेतन उठाने वाले इन 1100 संशयितों का वेतन रोकने और उनकी सीधी गिरफ्तारी की प्रबल संभावना है। पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक द्वारा गठित और सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके के नेतृत्व वाली SIT ने इस मामले में पुख्ता सबूत जुटाए हैं।
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SIT की जांच अभी है जारी
चार्जशीट में राज्य शिक्षा बोर्ड के सेवानिवृत्त अध्यक्ष नितिन उपासनी, तत्कालीन शिक्षा अधिकारी नितिन बच्छाव और भाऊसाहेब चव्हाण सहित किरण पाटिल, राहुल पवार और उदय पंचभाई जैसे एक दर्जन मुख्य मास्टरमाइंड्स के नाम शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक डेटा में भारी अंतर है।
एक ही जावक नंबर पर अलग-अलग स्कूलों और कर्मचारियों के नाम दर्ज कर जाली दस्तावेज तैयार किए गए थे। इस सांठगांठ में संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्य, संस्था संचालक और वेतन टीम के तत्कालीन अधिकारी शामिल हैं। SIT जल्द ही और सबूतों के साथ पूरक दोषारोपपत्र भी दाखिल करेगी।
