Zero Mile अंडरपास पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल! महामेट्रो से मांगी 13 मंजूरियों की रिपोर्ट
Nagpur Zero Mile: नागपुर हाई कोर्ट ने जीरो माइल अंडरपास निर्माण पर 13 मंजूरियों का ब्योरा महामेट्रो से मांगा, राष्ट्रीय सुरक्षा और फ्रीडम पार्क पर भी उठे सवाल।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर जीरो माइल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
High Court Notice: मानस चौक से जीरो माइल तक यातायात की भीड़ को कम करने के उद्देश्य से शुरू किए गए अंडरपास के निर्माण को लेकर हाई कोर्ट ने महामेट्रो प्रशासन से 13 आवश्यक मंजूरियों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। बुधवार को अदालत मित्र अधिवक्ता कुलदीप महल्ले द्वारा एक शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद यह खुलासा हुआ कि परियोजना के लिए कुल 13 अनुमतियां आवश्यक हैं।
कोर्ट ने मेट्रो प्रशासन को इस संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए शपथ पत्र दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया। मनपा की ओर से अधिवक्ता जैमीनी कासट, केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता मुग्धा चांदुरकर और मध्यस्थ अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता तुषार मंडलेकर ने पैरवी की।
राष्ट्रीय सुरक्षा और एनओसी का मुद्दा
इस योजना पर पहले पर्यावरण प्रेमी जयदीप दास ने पेड़ों की कटाई रोकने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे हाई कोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। हालांकि बाद में डॉ. दास ने हस्तक्षेप अर्ज दाखिल करते हुए यह आशंका जताई कि अंडरपास के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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इसके अतिरिक्त संदीप अग्रवाल और अन्य याचिकाकर्ताओं ने मध्यस्थी याचिका दायर करके यह उजागर किया कि निर्माण कार्य के लिए संरक्षण विभाग (रक्षा मंत्रालय) से ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (एनओसी) नहीं लिया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह प्रस्तावित अंडरपास सैन्य प्रतिष्ठानों के 100 मीटर के भीतर आता है, जिसके कारण इसे स्थानीय सैन्य प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य है।
फ्रीडम पार्क और यातायात का मूल्यांकन
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह चिंता भी व्यक्त की है कि इस योजना के कारण फ्रीडम पार्क के नष्ट होने की आशंका है। यह उद्यान नागपुर के ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक धरोहर का केंद्र माना जाता है और इसके निर्माण पर पहले ही 5 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। यातायात के संबंध में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस क्षेत्र में यातायात जाम का कोई मूल्यांकन नहीं हुआ है।
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उन्होंने अपने निजी यातायात सर्वेक्षण का हवाला दिया, जिसमें पाया गया कि दिन भर में औसतन केवल 800 वाहन ही इस मार्ग से गुजरते हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि मुख्य यातायात प्रवाह उत्तर-दक्षिण दिशा में है, जबकि प्रस्तावित अंडरपास पूर्व-पश्चिम दिशा में है। इसलिए उस क्षेत्र में यातायात तुलनात्मक रूप से अल्प है।
इस तरह की मंजूरी जरूरी
- संरक्षण विभाग (स्टेशन कमांडर) से अनुमति।
- वृक्ष प्राधिकरण, मनपा से पेड़ तोड़ने की अनुमति।
- महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल से तैयार मिक्स कंक्रीट और ईंधन/खतरनाक कचरे के भंडारण की अनुमति।
- केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से भूजल के निर्जलीकरण और पुनर्भरण की अनुमति।
- राज्य उत्खनन और भूगर्भशास्त्र विभाग से उत्खनन ऑपरेशन के लिए अनुमति।
- संबंधित अधिकारियों से पानी, बिजली, सीवरेज और टेलीफोन विभाग की एनओसी।
- यातायात विभाग से निर्माण स्थली पर यातायात व्यवस्थापन की अनुमति और निर्माण वाहनों के पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) की अनुमति।
