कोयले की काली दलाली: लैब रिपोर्ट में असली कोयले को बताया थर्ड क्लास, मुंबई की कंपनी ने WCL को लगा चूना!
Nagpur Coal Quality Fraud: WCL को कोयले की गुणवत्ता संबंधी कथित फर्जी रिपोर्टों के कारण 32.33 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले में निजी कंपनी के 2 अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
डब्ल्यूसीएल, कोयला घोटाला,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur WCL Coal Mines Fraud Case: नागपुर वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) की विभिन्न खदानों से निकाले गए कोयले की गुणवत्ता संबंधी फर्जी और भ्रामक रिपोर्ट तैयार कर कंपनी को 32.33 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में गिट्टीखदान पुलिस ने मुंबई स्थित एक निजी कंपनी के 2 अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
डब्ल्यूसीएल के महाप्रबंधक एसएस सुधाकर (57) की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। आरोपियों में सांताक्रूज निवासी अविचल शर्मा और प्रयागराज निवासी शिवपूजन सिंह का समावेश है।
कोयला गुणवत्ता जांच में हेराफेरी का आरोप, दो अधिकारी गिरफ्त में
शर्मा क्वालिटी सर्विसेज एंड सोल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मैनेजर (ऑपरेशन्स) हैं, जबकि सिंह कंपनी में ऑपरेशन्स हेड के पद पर कार्यरत हैं। यह कंपनी पावर फाइनेंस कार्पोरेशन में सूचीबद्ध है।
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पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने कथित रूप से आपसी साठगांठ कर डब्ल्यूसीएल की विभिन्न कोयला खदानों से बड़ी संख्या में नमूने एकत्र किए लेकिन सभी नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में नहीं भेजा। इसके बजाय सीमित नमूनों की जांच कराई गई और उसके आधार पर ऐसी परीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें कोयले की वास्तविक गुणवत्ता से कम दर्जे का दर्शाया गया।
रिपोर्ट में हेराफेरी
प्राथमिक जांच में प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्टों में हेराफेरी किए जाने के संकेत मिले हैं। आरोप है कि फर्जी रिपोर्टों के आधार पर कोयले की गुणवत्ता कम बताई गई जिससे डब्ल्यूसीएल को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
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शिकायत और आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर गिट्टीखदान पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस कथित घोटाले की गहन जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में अन्य व्यक्तियों या अधिकारियों की भी कोई भूमिका है या नहीं।
