नागपुर यूनिवर्सिटी में लापरवाही! आधे से ज्यादा पद खाली, डिग्री व माइग्रेशन के लिए भटकने को मजबूर छात्र

Nagpur RTMNU Vacant Posts: आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय में 1,122 स्वीकृत पदों में से 664 रिक्त हैं। शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी से शिक्षा, परीक्षा और प्रशासनिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
Negligence at Nagpur University! More than half the posts are vacant, leaving students forced to run from pillar to post for degrees and migration certificates.
नागपुर विश्वविद्यालय, रिक्त पद, शिक्षक कमी, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Teacher Staff Shortage: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (आरटीएमएनयू) में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी ने उत्त्च शिक्षा व्यवस्था को संकट में डाल दिया है। विश्वविद्यालय के 1 जुलाई 2025 के आंकड़ों के अनुसार कुल 1,122 स्वीकृत पदों में से 664 पद रिक्त हैं। इससे पढ़ाई, परीक्षा, मूल्यांकन और प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ने लगा है।

प्रशासनिक सेवाएं भी प्रभावित

रिक्त पदों के कारण विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। विद्यार्थियों को डिग्री, माइग्रेशन प्रमाणपत्र, अंकसूची और अन्य दस्तावेज प्राप्त करने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। कई विभाग सीमित संसाधनों और कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय में इतने बड़े पैमाने पर रिक्त पद उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा है। राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सभी रिक्त पद भरने की मांग की जाती रही है, ताकि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके और विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके। यह बात और है कि अभी तक इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया है।

आधे से ज्यादा शिक्षकेत्तर पद खाली

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, विवि में शिक्षकीय वर्ग के कुल 258 स्वीकृत पदों में से केवल 86 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 172 पद खाली हैं। सबसे गंभीर स्थिति प्राध्यापक पद की है। 37 स्वीकृत पदों में से सिर्फ एक प्राध्यापक कार्यरत है और 36 पद, यानी 97 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसी तरह सहयोगी प्राध्यापक के 70 में से 55 पद तथा सहायक प्राध्यापक के 135 में से 70 पद खाली हैं। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की स्थिति भी चिंताजनक है। कुल 864 स्वीकृत पदों में से केवल 372 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 492 पद रिक्त हैं। इसके तहत श्रेणी 'अ' के 75 प्रतिशत, श्रेणी 'ब' के 87 प्रतिशत, श्रेणी 'क' के 57 प्रतिशत और श्रेणी 'ड' के 48 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर

शिक्षकों की कमी के कारण कई विभागों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। एक शिक्षक को कई विषयों और विभागों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है और शोध, प्रोजेक्ट तथा प्रयोगात्मक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों की कमी का असर परीक्षा प्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है।

परीक्षा फॉर्म की जांच, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। यदि यही स्थिति बनी रही तो विद्यार्थियों को समय पर अंकसूची और परिणाम नहीं मिल पाएंगे जिससे उनके उच्च शिक्षा और रोजगार संबंधी अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

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