विकास ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Property Tax Waiver: महाराष्ट्र विधानसभा में नागपुर से जुड़े कई अहम मुद्दों को लेकर विधायक विकास ठाकरे ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मुंबई और नागपुर के बीच कथित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए जहां संपत्ति कर में छूट की मांग की वहीं गोरेवाड़ा प्राणी संग्रहालय से तेंदुओं की घुसपैठ, एनआईटी के कार्यों में पक्षपात, अग्निशमन व्यवस्था की बदहाली और एमएसआईडीसी में अनियमितताओं जैसे गंभीर विषयों को भी सदन में प्रमुखता से रखा।
विकास ठाकरे ने कहा कि मुंबई में वर्ष 2022 से 500 वर्ग फुट तक के घरों को संपत्ति कर से पूरी छूट दी गई है और अब इसे 700 वर्ग फुट तक बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके विपरीत नागपुर सहित अन्य महानगर पालिकाओं के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने बताया कि नागपुर महानगर पालिका ने 25 फरवरी 2022 को 500 वर्ग फुट तक कर माफी का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा था, जो अब तक लंबित है। उन्होंने मांग की कि मुंबई की तर्ज पर नागपुर में भी 700 वर्ग फुट तक के घरों को तत्काल कर मुक्त किया जाए।
गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी संग्रहालय से तेंदुओं की बढ़ती घुसपैठ को गंभीर बताते हुए ठाकरे ने नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। इस पर वन मंत्री गणेश नाईक ने आश्वासन दिया कि चिड़ियाघर की कंपाउंड वॉल की ऊंचाई जल्द बढ़ाई जाएगी और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में रखने के लिए प्रभावी योजना लागू की जाएगी।
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नागपुर सुधार प्रन्यास पर आरोप लगाते हुए ठाकरे ने कहा कि 8,000 से अधिक अनधिकृत प्लॉट्स का नियमितीकरण किया गया, लेकिन कई पात्र लेआउट्स को जानबूझकर लंबित रखा गया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक भेदभाव करार देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने महानगर पालिका की खस्ता हाल फायर ब्रिगेड व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले 3 वर्षों में 2,852 आग की घटनाएं हुईं, जबकि विभाग में भारी स्टाफ की कमी है। उपकरणों और संसाधनों की कमी के चलते नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है।
इसके अलावा एमएसआईडीसी में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए ठाकरे ने बृजेश दीक्षित को पद से हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में भी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगे थे और अब भी संदिग्ध कार्य जारी है। ठाकरे ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन मुद्दों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ेगा।