विदर्भ में जुलाई महीने में मानसून मेहरबान: सामान्य से 21% अधिक बारिश दर्ज, आंकड़ा 374 मिमी के पार!
Vidarbha Rainfall July: जुलाई 2026 में विदर्भ में मानसून मेहरबान रहा। पूरे क्षेत्र में 374.1 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य 309.3 मिमी की तुलना में 21% अधिक है।
- Written By: अंकिता पटेल
सोनेगांव तलाब का बढ़ गया जलस्तर (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Vidarbha Above Normal Rainfall: विदर्भ में मानसून इस बार जुलाई के महीने में काफी सक्रिय रहा। 1 जुलाई से 31 जुलाई के बीच विदर्भ के अधिकांश जिलों में झमाझम बारिश दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक इस पूरे महीने में विदर्भ में कुल औसत बारिश सामान्य से 21% अधिक रही। क्षेत्र में इस दौरान सामान्य रूप से 309.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी जिसके मुकाबले कुल 374.1 मिमी वास्तविक वर्षा दर्ज की गई।
जिलावार वर्षा के आंकड़े
- नागपुरः सामान्य 317.3 मिमी के मुकाबले 335.2 मिमी बारिश दर्ज की गई जो सामान्य से 6% अधिक है।
- गोंदियाः सामान्य (428.6 मिमी) के मुकाबले 668.3 मिमी बारिश हुई जो सामान्य से 56% अधिक है।
- बुलढाणाः सामान्य 192.8 मिमी के मुकाबले 291.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य से 51% अधिक है।
- यवतमालः सामान्य बारिश 259.6 मिमी थी जबकि इस बार 392 मिमी बारिश हुई जो 51% अधिक है।
- भंडाराः सामान्य 363 मिमी की तुलना में 482.6 मिमी बारिश हुई जो सामान्य से 33% अधिक है।
- वर्धाः सामान्य 274.1 मिमी के मुकाबले 330.5 मिमी बारिश दर्ज की गई जो 21% अधिक है।
- गड़चिरोलीः सामान्य 435.2 मिमी के मुकाबले 519.8 मिमी वर्षा हुई जो 19% अधिक है।
- वाशिमः सामान्य 241.3 मिमी के मुकाबले 275.3 मिमी बारिश हुई जो 14% अधिक है।
- अकोलाः सामान्य 222.3 मिमी के मुकाबले 233.5 मिमी बारिश हुई जो 5% अधिक है।
- चंद्रपुरः सामान्य 363.2 मिमी के मुकाबले 371.1 मिमी बारिश हुई जो सामान्य से 2% अधिक रही।
अमरावती एकमात्र जिला जहां दर्ज की गई कमी
विदर्भ के अन्य जिलों के विपरीत अमरावती एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां जुलाई महीने में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। अमरावती में सामान्य वर्षा 268 मिमी होनी चाहिए थी। इसके मुकाबले 246.6 मिमी बारिश ही हुई जो सामान्य से 8% कम है।
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जुलाई के इन आंकड़ों से साफ है कि विदर्भ के अधिकांश जिलों में इस साल मानसूनी गतिविधियों ने अच्छी खासी तेजी दिखाई है जिससे कृषि कार्यों को भी गति मिली है। हालांकि कुछ स्थानों पर अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं।
