नवभारत विशेष: होर्मुज का विकल्प भारत के लिए कितना खास ? बदल रही खाड़ी की ऊर्जा रणनीति
Gulf Oil Routes: होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते जोखिम के बीच सऊदी, यूएई और इराक पाइपलाइन, रेल और नए निर्यात टर्मिनलों के जरिए तेल-गैस निर्यात के वैकल्पिक मार्ग तेजी से विकसित कर रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
होर्मुज जलडमरूमध्य, खाड़ी देश (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Hormuz Strait Alternatives: खाड़ी देशों की सरकारों ने यह समझ लिया है कि ईरान का ‘होमुंज को बंद करने का कार्ड’ उनकी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए स्थायी खतरा है। ‘वार-रिस्क बीमा प्रीमियम’ आठ गुना बढ़ने के साथ उत्पादन में 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन कटौती की नौबत आ गई।
ऐसे में फारस की खाड़ी से दुनिया तक तेल और गैस पहुंचाने वाली इस जलडमरूमध्य की संकरी पट्टी पर अत्यधिक निर्भरता असहनीय होने से पहले उनमें पाइपलाइनों, सी-कॉरिडोर, रेलवे और नए एक्सपोर्ट टर्मिनल्स का एक नया बुनियादी ढांचा विकसित करने की होड़ शुरू होना स्वाभाविक है।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इराक मौजूदा पाइपलाइनों की क्षमता बढ़ाने से लेकर नए निर्यात टर्मिनल, रेल और जमीनी कॉरिडोर विकसित करने में जुटे हैं। सऊदी अरब का दावा है कि 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट ‘पेट्रोलाइन’ जो उसके पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू से जोड़ती है, उसकी क्षमता उसने सात मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है।
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होर्मुज संकट से बचने को खाड़ी देशों की नई रणनीति
यूएई के पास अबूधाबी से फुजैराह तक जो पाइपलाइन दो मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता की है, उसके समानांतर उससे ज्यादा क्षमता खाड़ी देशों की सरकारों ने यह समझ लिया है कि ईरान का ‘होमुंज को बंद करने का कार्ड’ उनकी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए स्थायी खतरा है। ‘वार-रिस्क बीमा प्रीमियम’ आठ गुना बढ़ने के साथ उत्पादन में 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन कटौती की नौबत आ गई।
ऐसे में फारस की खाड़ी से दुनिया तक तेल और गैस पहुंचाने वाली इस जलडमरूमध्य की संकरी पट्टी पर अत्यधिक निर्भरता असहनीय होने से पहले उनमें पाइपलाइनों, सी-कॉरिडोर, रेलवे और नए एक्सपोर्ट टर्मिनल्स का एक नया बुनियादी ढांचा विकसित करने की होड़ शुरू होना स्वाभाविक है।
होर्मुज संकट से निपटने को खाड़ी देशों की नई तेल रणनीति
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इराक मौजूदा पाइपलाइनों की क्षमता बढ़ाने से लेकर नए निर्यात टर्मिनल, रेल और जमीनी कॉरिडोर विकसित करने में जुटे हैं। सऊदी अरब का दावा है कि 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट ‘पेट्रोलाइन’ जो उसके पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू से जोड़ती है, उसकी क्षमता उसने सात मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है।
यूएई के पास अबूधाबी से फुजैराह तक जो पाइपलाइन दो मिलियन बैरल प्रतिदिन की क्षमता की है, उसके समानांतर उससे ज्यादा क्षमता सऊदी और यूएई का तेल होर्मुज बंद होने पर भी फुजैराह अथवा यानबू से उपलब्ध रहेगा। ओमान की खाड़ी माने फुजैराह या सोहार भारत के पश्चिमी तट यथा जामनगर, मुंद्रा, मंगलौर के बेहद करीब है।
होर्मुज विकल्प से तेल राहत, लेकिन LNG पर बनी रहेगी चिंता
होर्मुज के अंदर जाने की बजाय फुजैराह या सोहार से तेल लोड करने पर भारतीय जहाजों को 2 से 3 दिन की यात्रा कम करनी पड़ेगी, जिससे ‘टन-माइल’ लागत और समुद्री भाड़े में बचत होगी। आपूर्ति के अनेक रास्ते युद्ध-जोखिम प्रीमियम, टैंकरों की कमी और अचानक आयात रुकने की आशंका घटा देंगे।
भारतीय रिफाइनरियां अमेरिका, ब्राजील, अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच स्रोत बदलने को लेकर बेहतर सौदेबाजी कर सकेंगी। भारत की बड़ी चिंता केवल कच्चा तेल नहीं, एलएनजी भी है। पाइपलाइन तेल को होर्मुज से बचा सकती है, लेकिन कतर की एलएनजी को उसी सहजता से जमीन पर मोड़ा नहीं जा सकता।
कतर की एलएनजी के लिए कोई पाइपलाइन बाईपास मौजूद न होने से होर्मुज में किसी भी दीर्घकालिक रुकावट से भारतीय गैस आधारित उद्योग, उर्वरक, शहरी गैस और बिजली क्षेत्र तक असर पहुंचा सकता है।
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ओमान की खाड़ी से तेल मंगाना फायदेमंद
होर्मुज से हटने की प्रक्रिया में खाड़ी के तेल उत्पादक देश उसके विकल्प तलाश रहे हैं। पश्चिमी एशियाई देशों की इन कोशिशों से दुनिया में तीसरे नंबर के तेल और गैस आयातक भारत को क्या नफा नुकसान होगा? अमेरिका-ईरान तनाव स्थायी होते देख पश्चिम एशिया के तेल उत्पादक देशों ने होर्मुज के विकल्य की तलाश तेज कर दी है।
लेख- संजय श्रीवास्तव के द्वारा
