हर जुबां पर तेंदुआ..वन संरक्षण पर चुप्पी! धड़ल्ले से कट रहे जंगल, महाराष्ट्र में महासंकट की बड़ी आहट
Human-Wildlife Conflict: नागपुर में तेंदुआ दहशत के बीच जंगल कटाई और आवास खत्म होने से मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ा। वन संरक्षण रणनीति न होने पर गंभीर सवाल उठ रहे है।
- Written By: प्रिया जैस
तेंदुआ (AI Generated Image)
Forest Department Nagpur: बीते कुछ दिनों से नागपुर समेत पूरे राज्य में तेंदुए चर्चा का विषय बने हुए हैं। मानव बस्तियों तक तेंदुओं के पहुंचने पर लोगों में भय और वन विभाग के प्रति रोष का माहौल है। हर जुबान पर तेंदुआ बसा हुआ है। हालांकि उनके देखे जाने और लोगों पर हमला करने की चर्चाएं चारों तरफ हो रही हैं लेकिन उनके मानव बस्तियों तक पहुंचने के मुख्य कारण पर कोई चर्चा नहीं हो रही।
वन संरक्षण एक अहम मुद्दा है। धड़ल्ले से जंगल काटे जा रहे हैं। जंगल कटने की वजह से तेंदुओं के आवास घट रहे हैं। इस कारण ये जंगली बिल्लियां मानव बस्तियों तक पहुंच रही हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव टकराव बढ़ रहा है। यदि वन संरक्षण की ओर गंभीरता बरती जाए तो निश्चित रूप से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है।
यह तब ही संभव हो सकेगा जब संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता बरतेंगे। यदि वन संरक्षण के प्रति तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में स्थिति अधिक बदतर हो सकती है। यह मानव समेत वन्यजीवों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
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विधानमंडल में भी नहीं उठा मुद्दा
हाल ही में विधानमंडल का शीत सत्र समाप्त हुआ। दोनों सदनों में तेंदुओं द्वारा मानव बस्तियों तक पहुंचने और लोगों पर हमला करने का मुद्दा कई नेताओं द्वारा उठाया गया। हालांकि वन संरक्षण का मुद्दा किसी ने नहीं उठाया। प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन संरक्षण एक अहम मुद्दा है। इस पर चर्चा और उपाय योजना समय की मांग है।
तेंदुआ संकट पर रणनीति कब?
शीत सत्र के दौरान मंगलवार, 9 दिसंबर को वन मंत्री ने आश्वासन दिया था कि तेंदुआ संकट पर 5 दिनों में रणनीति बनाई जाएगी। इस घोषणा को 1 हफ्ता बीत गया है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर तेंदुआ संकट पर रणनीति कब बनेगी। तेंदुओं का मुद्दा केवल नागपुर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में गरमाया हुआ है। ऐसे में लोगों को तत्काल उपाय योजना का इंतजार है।
वाइल्ड लाइफ मॉनिटरिंग बढ़ाना अनिवार्य
हाल के दिनों में मानव–तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हुई है जो वन्यजीव गलियारों में आवास संरक्षण और वन्यजीव संचार में बाधा की गंभीर समस्या को उजागर करती है। इस चुनौती से निपटने के लिए दीर्घकालिक और रणनीतिक योजना के साथ-साथ नियमित निगरानी (वाइल्ड लाइफ मॉनिटरिंग) की आवश्यकता है। विशेष रूप से प्रादेशिक वनों जैसे संरक्षित क्षेत्रों में यह बेहद जरूरी है, ताकि सह-अस्तित्व और प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
– अजिंक्य भटकर, मानद वन्यजीव रक्षक, नागपुर
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वन संरक्षण के लिए रणनीति जरूरी
पारडी में तेंदुआ के हमले की घटना बेहद दुखद है। जंगल कटने से तेंदुओं के आवास और शिकार घट रहे हैं। शिकार की तलाश में वे मानव बस्तियों तक पहुंच जाते हैं। वन संरक्षण के लिए वन विभाग समेत अन्य विभाग को समन्वय के साथ रणनीति बनाना जरूरी है। लोगों से अपील है कि तेंदुआ दिखने वाली जगह पर भीड़ न लगाएं। उससे दूरी बनाए रखें और उसे निकलने का मार्ग प्रदान करें। वन्यजीव दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
– डॉ. विनीता व्यास, उप वन संरक्षक, नागपुर प्रादेशिक
नवभारत लाइव पर नागपुर से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट
