

TAVR Surgery Valve Replacement: भारत में बढ़ती उम्र के साथ दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है एओर्टिक स्टेनोसिस (दिल के एओर्टिक वाल्व का सिकुड़ना)। यह एक गंभीर हृदय रोग है, जिसका अक्सर तब पता चलता है जब यह मरीज की जीवनशैली और रोजमर्रा के कामों पर बड़ा असर डालने लगता है। सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर आना, थकान, बेहोशी और शारीरिक गतिविधियों में कमी को कई बार उम्र बढ़ने का सामान्य लक्षण मान लिया जाता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
एओर्टिक स्टेनोसिस में दिल का एओर्टिक वाल्व संकरा हो जाता है, जिससे हृदय से शरीर के बाकी हिस्सों तक रक्त का प्रवाह बाधित होता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह हार्ट फेलियर, बार-बार अस्पताल में भर्ती होने और जानलेवा स्थिति तक पहुंच सकता है। पारंपरिक रूप से खराब वाल्व को बदलने के लिए ओपन-हार्ट सर्जरी की जाती थी, लेकिन कई बुजुर्ग मरीज दूसरी गंभीर बीमारियों के कारण इस सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते। ऐसे मरीजों के लिए ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (TAVR) एक सुरक्षित और कम जोखिम वाला विकल्प बनकर उभरा है।
TAVR प्रक्रिया में खून की नली के रास्ते कैथेटर डालकर खराब वाल्व को बदला जाता है। इससे बड़ी सर्जरी से बचाव होता है और मरीज तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। नागपुर के सिनर्जी हॉस्पिटल में मेड-इन-इंडिया तकनीक की मदद से गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस से जूझ रहे दो हाई-रिस्क बुजुर्ग मरीजों का सफल TAVR इलाज किया गया। दोनों मरीजों को कई अन्य बीमारियों के कारण ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए जोखिम भरा माना गया था।
पहले मरीज की उम्र 75 वर्ष थी। उन्हें गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस के साथ हृदय की पंपिंग क्षमता में कमी, क्रोनिक किडनी डिजीज और फेफड़ों की बीमारी भी थी। इन चुनौतियों के बावजूद विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक TAVR प्रक्रिया पूरी की और हृदय में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाया।
दूसरी मरीज बुजुर्ग महिला थीं, जिन्हें गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस के कारण सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी और उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। कई स्वास्थ्य समस्याओं के कारण ओपन-हार्ट सर्जरी मुश्किल थी, लेकिन मिनिमली इनवेसिव वाल्व रिप्लेसमेंट सफल रहा। इलाज के बाद दोनों मरीजों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उन्हें दो से तीन दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, यह आधुनिक तकनीक की बड़ी उपलब्धि है, खासकर उन मरीजों के लिए जो पारंपरिक सर्जरी का जोखिम नहीं उठा सकते। इन दोनों प्रक्रियाओं में स्वदेशी कैथ लैब इमेजिंग सिस्टम और भारत में निर्मित ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व का इस्तेमाल किया गया। यह दिखाता है कि भारत अब विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सिनर्जी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशर खान ने कहा कि कई बुजुर्ग सांस फूलने, थकान और कम शारीरिक क्षमता को उम्र का असर मान लेते हैं, जबकि ये गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने समय पर जांच और इलाज को बेहद जरूरी बताया।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लगातार सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी या शारीरिक क्षमता में कमी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से दिल को होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है। दो हाई-रिस्क मरीजों का सफल इलाज यह साबित करता है कि विशेषज्ञ चिकित्सा, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मेड-इन-इंडिया तकनीक का मेल भारत में गंभीर हृदय रोगों के इलाज की नई संभावनाएं खोल रहा है।