
बॉम्बे हाई कोर्ट (डिजाइन फोटो)
Maharashtra News: मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि छात्र शिकायत निवारण समिति द्वारा की गई सिफारिशें शैक्षणिक संस्थानों के लिए बाध्यकारी होती हैं। खंडपीठ ने महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को 12 अप्रैल 2025 को ‘एसजीआरसी’ द्वारा दी गई सिफारिशों को तत्काल लागू करने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने सुनाया।
विश्वविद्यालय में बीए एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई कर रहे अमन जायसवाल को अपर्याप्त उपस्थिति के कारण 5वें सत्र की परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था। इस मामले में प्रमुख मुद्दा यह था कि क्या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2023 के नियमों के अनुसार ‘एसजीआरसी’ की सिफारिशें संस्थानों पर सख्ती से लागू होती हैं या नहीं। अमन की ओर से एड। कार्तिक शुकुल ने तर्क पेश किया।
खंडपीठ ने कहा कि यूजीसी के 2023 के नियमों के खंड 10 (परिणाम न मानने पर) के अनुसार, यदि ‘एसजीआरसी’ की सिफारिशों को नहीं माना जाता है तो संस्थान को विभिन्न दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। यह दर्शाता है कि ऐसी सिफारिशें बाध्यकारी हैं।
यह भी पढ़ें – पटोले को ‘बाप’ पर नहीं जाना था, नाना पर भड़के बावनकुले, दिया करारा जवाब, बोले- कांग्रेस का अंत तय
‘एसजीआरसी’ ने अमन की शिकायत पर 12 अप्रैल को बैठक बुलाई थी। ‘एसजीआरसी’ ने अमन को विशेष परीक्षा देने की अनुमति दी। उसने उल्लेख किया कि छात्र को हॉस्टल खाली करने के लिए कहे जाने के कारण वह कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो सका। उसे परीक्षा से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
सिफारिशों के बावजूद MNLU ने अमन को परीक्षा में बैठने से रोका जिसके बाद उसने उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ‘एसजीआरसी’ की सिफारिशों को तुरंत लागू करने का आदेश विश्वविद्यालय को दिया गया है और छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने वाला यह निर्णय महत्वपूर्ण है।






