नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur University Senate Meeting: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के छात्रावासों में वाई-फाई सुविधा शुरू करने में हो रही देरी का मुद्दा शुक्रवार को हुई सीनेट बैठक में जोरदार तरीके से उठा। करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों को इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है, जिस पर सदस्यों ने प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक के दौरान कई सदस्यों ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में वाई-फाई किसी विलासिता की नहीं बल्कि बुनियादी सुविधा बन चुकी है। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय को केवल वाई-फाई जैसी साधारण सुविधा शुरू करने में ही एक वर्ष लग रहा है, तो आधुनिकीकरण के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि नागपुर विश्वविद्यालय आधुनिक सुविधाओं की घोषणाएं तो करता है, लेकिन छात्रावासों में मूलभूत इंटरनेट व्यवस्था तक समय पर उपलब्ध नहीं करा पा रहा। सदस्यों ने याद दिलाया कि 8 मार्च 2025 को भी यह विषय सीनेट में उठाया गया था।
उस समय प्रशासन की ओर से जल्द वाई-फाई शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आई। छात्रावास प्रशासन द्वारा बार-बार पत्राचार किए जाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि छात्रावास भवनों के बड़े पैमाने पर नवीनीकरण का प्रस्ताव है, जिसकी लागत लगभग पांच करोड़ रुपये है। इस कार्य में शौचालय ब्लॉक, प्लास्टर, प्लंबिंग, सैनेटरी कार्य, दरवाजे-खिड़कियां और करीब सौ कमरों में टाइल्स लगाने जैसे काम शामिल हैं। प्रशासन का कहना था कि यदि अभी नेटवर्क या नई वायरिंग की व्यवस्था की जाती है, तो नवीनीकरण के दौरान उसे नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इसलिए वाई-फाई से जुड़ा काम फिलहाल स्थगित रखा गया है। हालांकि इस स्पष्टीकरण से कई सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि नवीनीकरण और वाई-फाई सुविधा का सीधा संबंध नहीं है और अस्थायी व्यवस्था के जरिए भी छात्रों को इंटरनेट उपलब्ध कराया जा सकता है। कुछ सदस्यों ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के पास मोबाइल है। इसलिए वाई-फाई की जरूरत नहीं जैसी सोच पूरी तरह गलत है।
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बैठक में आईटी विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि वाई-फाई के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद हेतु टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तकनीकी और वित्तीय बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद विक्रेता का चयन किया जाएगा और फिर कार्यादेश जारी होगा। पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लगने की बात भी प्रशासन ने कही।
इस पर सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि छात्रों को वाई-फाई उपलब्ध कराना कोई विवाद का विषय नहीं, बल्कि आज की अनिवार्य जरूरत है। उन्होंने इस कार्य के लिए निश्चित समयसीमा तय करने की भी मांग की। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा और अगले शैक्षणिक सत्र से पहले छात्रावासों में इंटरनेट सुविधा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।