नागपुर यूनिवर्सिटी सीनेट में भारी हंगामा! पीएचडी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर भड़के सदस्य

Nagpur University Senate Meeting: नागपुर विश्वविद्यालय सीनेट में पीएचडी प्रवेश और आरआरसी बैठकों में देरी पर हंगामा। प्रशासन का बड़ा फैसला: जून तक पूरी होगी प्रक्रिया, पीईटी वैधता पर दी राहत।
Nagpur University Senate erupts over PhD admission delays and RRC meeting irregularities. Admin promises to clear all pending processes by June 2026.
नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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RTMNU PhD Admission 2026: नागपुर विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया, आरआरसी बैठकों की नियमितता और कोर्सवर्क शुल्क के मुद्दों पर सदस्यों ने नाराजगी व्यक्त की। कई सदस्यों ने छात्रों की समस्याओं को सामने रखते हुए प्रशासन से स्पष्ट और सुसंगत नीतियां घोषित करने की मांग की।

सभा में यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य स्तरीय परीक्षा (पीईटी) के समय जो नियम लागू थे, वही पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में भी लागू रहेंगे। पेट की वैधता चाहे एक वर्ष, दो वर्ष या आजीवन कायम रहेगी। इसका मतलब यह है कि जिन छात्रों की वैधता समाप्त होने वाली है और जिन्होंने प्रोविजनल प्रवेश की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली है, उन्हें पुनः परीक्षा देने या शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रशासन ने बताया कि कुछ छात्रों का प्रोविजनल प्रवेश हुआ था, लेकिन आरआरसी बैठकें समय पर नहीं होने के कारण उनका अंतिम प्रवेश तय नहीं हो पाया था। दिसंबर 2024 के बाद लंबी अवधि तक बैठकें न होने के कारण कई छात्रों के प्रवेश लंबित रहे। हालांकि 7 मार्च से आरआरसी बैठकें शुरू हो गई हैं और जिन छात्रों की पेट वैधता समाप्त होने वाली है, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।

कोर्सवर्क शुल्क पर विवाद

सभा में इस बात का भी मुद्दा उठाया गया कि पीएचडी कोर्सवर्क के दौरान छात्रों से 7,000 रुपये शुल्क लिया गया। यह कोर्स 9 से 16 फरवरी के बीच आयोजित किया गया था। सदस्यों ने बताया कि 2024 के निर्देशों के अनुसार छात्रों से ऐसा शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कोर्स एचआरडीसी के मानक अनुसार ऑफलाइन आयोजित किया गया था।

कई छात्रों का कोर्सवर्क लंबित था और एनपीटीईएल-स्वयं प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक संबंधित कोर्स उपलब्ध नहीं थे। इसलिए यह विकल्प उपलब्ध कराया गया। छात्रों को एनपीटीईएल-स्वयं, मदन मोहन मालवीय मिशन या विश्वविद्यालय के विभागों के माध्यम से कोर्स पूरा करने के विकल्प भी दिए गए। इसके अलावा 2 से 14 मार्च तक एचआरडीसी में हुए कोर्स में शामिल लगभग 60 छात्रों को आरआरसी में आवेदन की समयसीमा बढ़ाने की मांग की गई।

जून तक होगी प्रक्रिया पूरी

प्रशासन ने छात्रों को अवसर देने के लिए कुछ आरआरसी बैठकें आगे बढ़ाईं। कुछ सदस्यों ने विश्वविद्यालय से जुड़े शोध केंद्रों को भी कोर्सवर्क आयोजित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। प्रशासन ने बताया कि पीएचडी कोर्सवर्क कुल 12 क्रेडिट का होता है, जिसमें 6 क्रेडिट रिसर्च मेथाडोलॉजी और बाकी 6 क्रेडिट संबंधित शोध केंद्रों की जिम्मेदारी हैं। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया। चर्चा में प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि छात्रों के लंबित कोर्सवर्क और आरआरसी प्रक्रियाओं का बकाया जून तक पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

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