नागपुर डिवीजन निर्यात रिकॉर्ड (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Business News: औद्योगिक और कृषि-आधारित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियों के कारण नागपुर संभाग ने इस वर्ष झंडे गाड़ दिए हैं। संभाग से इस साल कुल 22,627 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। यह पिछले साल की तुलना में 5,130 करोड़ रुपये अधिक है जो लगभग 29% की औसत वृद्धि है।
विशेष रूप से भंडारा और गड़चिरोली जिलों से चावल के निर्यात को प्रोत्साहित करने से भंडारा में 203% और गड़चिरोली में 182% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।
पिछले 3 सालों से निर्यात में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नीतियों ने निर्यात को बढ़ावा दिया है जिसके परिणामस्वरूप गड़चिरोली जिले से कृषि-आधारित उत्पादों खासकर चावल के निर्यात में 98% की वृद्धि हुई है। गड़चिरोली अब कृषि-आधारित उद्योगों में भी अपनी प्रगति साबित कर रहा है। इसके अलावा खनन और दवा उद्योग से भी निर्यात शुरू हो गया है।
नागपुर डिवीजन से चावल के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, साथ ही सरकारी प्रोत्साहन नीतियों के तहत खनिज उत्पाद, जिंक आर्टिकल, मछली उत्पाद, सिल्क मेटल प्लेटिंग, लकड़ी का पल्प, ऊन और लकड़ी से बने उत्पादों का भी निर्यात किया जा रहा है। राज्य के उद्योग विभाग के निरंतर प्रयासों के कारण नागपुर डिवीजन से दुनिया के विभिन्न देशों में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
जिला | राशि | फीसदी |
---|---|---|
नागपुर | 17,340 करोड़ रुपये | 29% की वृद्धि |
वर्धा | 1,006 करोड़ रुपये | 32% की वृद्धि |
गोंदिया | 2,161 करोड़ रुपये | 24% की वृद्धि |
भंडारा | 465 करोड़ रुपये | 203% की वृद्धि |
चंद्रपुर | 1,622 करोड़ रुपये | 20% की वृद्धि |
गड़चिरोली | 32 करोड़ रुपये | 182% की वृद्धि |
चावल के निर्यात में नागपुर से 14%, गोंदिया से 98%, भंडारा से 65% और गड़चिरोली से 98% की वृद्धि हुई है। वर्धा जिले से कपास-आधारित उत्पादों में 54% और स्टेपल फैब्रिक में 21% की बढ़ोतरी हुई है। चंद्रपुर से हथियार और गोला-बारूद के निर्यात में 67% और पेपर उत्पादों में 11% की वृद्धि हुई है।
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उद्योग सह-निदेशक गजेंद्र भारती ने बताया कि निर्यात को बढ़ावा देने की नीति के अनुसार नागपुर डिवीजन से कृषि उत्पादों के अलावा इंजीनियरिंग, परमाणु रिएक्टर, विस्फोटक, फार्मास्युटिकल्स, मेटलवेयर, लोहा और इस्पात, कपड़ा, रत्न और आभूषण जैसे उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। औद्योगिक नीति-2019 के तहत निर्यातकों को विभिन्न रियायतें और सब्सिडी दी जा रही है। इसमें कर वापसी, ऋण वापसी, बिजली दर वापसी, स्टाम्प शुल्क में छूट और बिजली दरों में रियायतें शामिल हैं।