नागपुर में मेट्रो की पटरियों पर पहुंचा ‘पॉर्क्यूपाइन’, TTC ने रेस्क्यू कर दिया जीवनदान
Nagpur Metro Rescue: शनिवार को दोपहर में एक एक पॉर्क्यूपाइन मेट्रो की पटरियों पर पहुंचा। पॉर्क्यूपाइन को मेट्रो की पटरियों पर दौड़ते हुए देखा गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
- Written By: प्रिया जैस
मेट्रो की पटरियों पर पहुंचा पॉर्क्यूपाइन (सौजन्य-नवभारत)
Porcupine Rescue: नागपुर में शनिवार को दोपहर में एक हैरतअंगेज घटना सामने आई। एक पॉर्क्यूपाइन (साही) मेट्रो की पटरियों तक जा पहुंचा। मेट्रो की पटरियों पर दौड़ते हुए पॉर्क्यूपाइन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह घटना कांग्रेसनगर से अजनी मेट्रो स्टेशन के बीच हुई।
सूचना मिलने पर ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उन्होंने कड़ी मशक्कत कर पॉर्क्यूपाइन को समय रहते रेस्क्यू कर नया जीवनदान दिया। पॉर्क्यूपाइन को रेस्क्यू करने में वनपाल सुधाकर मरसकोल्हे, बंडू मंगर, चेतन बारस्कर और स्वप्निल भूरे ने सहयोग किया।
1 घंटे तक चली भागमभाग
मौके पर पहुंचकर टीटीसी की टीम ने पॉर्क्यूपाइन को पकड़ने का कार्य शुरू किया। कभी मेट्रो से पॉर्क्यूपाइन का पीछा किया गया तो कभी मेट्रो से उतरकर उसके पीछे भागना पड़ा। यह वन्यजीव बार-बार पटरियों के बीच में आकर मेट्रो को रुकवा देता था। कांग्रेसनगर से अजनी स्टेशन के बीच लगभग 1 घंटे भागमभाग चली।
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मेट्रो कर्मी हुए जख्मी
पॉर्क्यूपाइन के नुकीले कांटों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन जोखिम भरा था। बारिश ने इसे और मुश्किल बना दिया था। पटरियों के चारों ओर काई जमी हुई थी। काई के चलते मेट्रो कर्मी दिलेश मेश्राम फिसल गए। उनके हाथ, पैर और पीठ में गंभीर चोटें आईं। ऐसी स्थिति में भी वे मशक्कत में जुटे रहे। आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद टीटीसी के जवानों ने पॉर्क्यूपाइन को पकड़ लिया और रेस्क्यू ऑपरेशन सफल बनाया।
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27 दिनों में 18,401 श्वानों का वैक्सीनेशन
नागपुर में ‘डब्ल्यूवीएस होप’ मिशन रेबीज के तहत कार्य किया जा रहा है। सितंबर के 27 दिनों में 18,401 कुत्तों का वैक्सीनेशन किया गया। डब्ल्यूवीएस होप एक गैर सरकारी संगठन है जो मिशन रेबीज और वर्ल्डवाइड वेटरनरी सर्विस (डब्ल्यूवीएस) के साथ मिलकर आवारा कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण करता है। साथ ही समुदायों को रोकथाम के बारे में शिक्षित करके रेबीज से निपटने के लिए काम करता है। व्यापक कार्यक्रमों के माध्यम से 2030 तक भारत को रेबीज मुक्त बनाना है।
