अन्यथा अदालत में हाजिर रहे सरपंच, कोर्ट की अवमानना पर HC सख्त
- Written By: नवभारत डेस्क
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नागपुर. कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी निर्मित करने के लिए नियमों के अनुसार आवश्यक सभी तरह की मंजूरियां लेने के बावजूद सरपंच और अन्य द्वारा इसकी अनुमति प्रदान नहीं किए जाने से मेसर्स दशीन अस्पैटिक रिलीफ क्लीनिक लैब ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की. इस पर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) देने के आदेश सरपंच और अन्य को दिए थे. इन आदेशों का पालन नहीं किया गया जिससे अब कोर्ट की अवमानना की याचिका दायर की गई. इसकी सुनवाई के बाद न्यायाधीश एएस चांदुरकर और न्यायाधीश जीए सानप ने 10 दिनों के भीतर आदेशों के अनुसार निर्णय लेने, अन्यथा 8 मार्च को अदालत में हाजिर रहने के आदेश धारगांव सरपंच को दिए.
नहीं निभाया जा रहा मूलभूत दायित्व
याचिका पर अदालत का मानना था कि पर्यावरण के प्रति सजग याचिकाकर्ता निजी जमीन पर इस तरह का प्रकल्प तैयार करने जा रहा है. इसके लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी नियमों के अनुसार मंजूरी प्राप्त की गई. राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग ने भी सकारात्मकता दिखाई लेकिन सरपंच इसके इच्छुक दिखाई नहीं दे रहे हैं. अलबत्ता यह सुविधा तैयार न हो इसी तरह के प्रयास हो रहे हैं. संविधान की धारा 51 (ए) (जी) के अनुसार सौंपे गए मूलभूत दायित्व को भी निभाया नहीं जा रहा है. यहां तक कि 26 जनवरी 2019 को बैठक लेकर प्रस्ताव पारित कर दिया जिसमें मंजूरी देने से साफ इनकार किया गया. इसी तरह से 18 दिसंबर 2018 को भी बैठक लेकर एनओसी देने से इनकार किया गया था. एनओसी क्यों नहीं दी जा रही, इसके कारणों का खुलासा तक नहीं किया गया.
केंद्रीय एजेंसी के स्पष्ट निर्देश
अदालत का मानना था कि केंद्रीय एजेंसी सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने 28 मार्च 2016 को अध्यादेश जारी किया था जिसके अनुसार कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी उपलब्ध कराने तथा इसके लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराने का दायित्व स्थानीय निकाय संस्थाओं का है. तमाम शर्तों का पालन करने के बाद भी याचिकाकर्ता को इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है. अत: ग्राम पंचायत में सकारात्मक प्रस्ताव लेकर एनओसी देने के आदेश अदालत ने दिए थे जिनका पालन नहीं किया गया. अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किए जाने के बाद सरपंच ने हलफनामा दायर किया. इसके साथ ग्राम सभा द्वारा एनओसी देने से इनकार किए जाने का प्रस्ताव भी जोड़ा. इस संदर्भ में अदालत ने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत को निर्णय लेने के आदेश दिए थे, न कि ग्राम सभा को. इसके बाद भी ग्राम सभा में प्रस्ताव लाकर एनओसी देने से इनकार किया गया.
