
प्रभाग रचना का प्रारूप तैयार (कंसेप्ट फोटो, सोशल मीडिया)
Nagpur News: मनपा चुनाव को लेकर राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार भले ही दिशानिर्देश जारी किए जाने के बाद प्रभाग रचना का प्रारूप तैयार हो चुका हो किंतु प्रभाग रचना को अंतिम करने तक की प्रक्रिया के बीच तारीखों की लंबी अवधि को देखते हुए अभी भी मनपा चुनाव को लेकर संदेह जताया जा रहा है। एक ओर जहां केंद्र में कई कारणों से राजनीति में खलबली मची हुई है वहीं दूसरी ओर राज्य की राजनीति में भी अस्थिरता के बादल मंडरा रहे हैं।
ऐसे में किसी भी समय कुछ भी होने की संभावना जताई जा रही है। बहरहाल अब प्रक्रिया के अनुसार प्रभाग रचना का कच्चा प्रारूप तैयार हो चुका है। इस पर समिति के हस्ताक्षर 31 जुलाई तक होने हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रभाग रचना के प्रारूप पर समिति के हस्ताक्षर के लिए 7 दिन का समय संभवत: पहली बार निर्धारित किया गया है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो नए सिरे से भले ही प्रभाग रचना का प्रारूप तैयार किए जाने की घोषणा की जा रही हो किंतु वास्तविक रूप में यह रचना वर्ष 2017 के अनुसार ही होने की प्रबल संभावना है। केवल कुछ प्रभागों में मामूली परिवर्तन किए जाएंगे।
नागपुर महानगर पालिका में वर्ष 2017 में भी वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही चुनाव कराए गए थे। राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद महाविकास आघाड़ी की सरकार ने 3 सदस्यीय प्रभाग पद्धति लागू की थी। बाद में पुन: सत्ता परिवर्तन होने के बाद से ही प्रभाग पद्धति बदलने के कारण सीमांकन लगभग तय माना जा रहा था।
मनपा चुनाव के लिए तय की जा रही प्रक्रिया में ओबीसी आरक्षण को लेकर नियमों की कोई अड़चन नहीं है किंतु राजनीतिक दलों की ओर से ओबीसी को उचित अनुपात में आरक्षण देने की तैयारी मानी जा रही है।
विशेष रूप से नागपुर महानगर पालिका में वर्ष 2017 में 4 सदस्यीय प्रभाग पद्धति थी। भाजपा के लिए 4 सदस्यीय प्रभाग पद्धति काफी लाभदायक साबित रही है। इसी प्रभाग पद्धति के भरोसे तीसरी बार मनपा में सत्ता प्राप्त की गई थी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार ‘एक इंजन और 3 डिब्बे’ का फॉर्मूला लेकर भाजपा की कार्यपद्धति रही है।
इस तरह से प्रभाग में एक सक्षम प्रत्याशी देकर अन्य तीन प्रत्याशियों को उसके साथ जोड़कर जीत सुनिश्चित करने की कवायद होती रही है। वर्ष 2017 के चुनाव में इस तरह का चित्र अधिकांश प्रभागों में दिखाई दिया था। इसी की पुनरावृत्ति होने की संभावना अब 2026 के चुनाव में देखने को मिल सकती है।
नए सिरे से 4 सदस्यीय प्रभाग पद्धति के लिए प्रभाग रचना की प्रक्रिया का निर्धारण किया जा रहा है। भले ही 2017 का ही फॉर्मूला ले लिया जाए लेकिन प्रक्रिया पूरी करनी ही होगी। प्रभाग भले ही 2017 के अनुसार हों किंतु नए सिरे से प्रभाग आरक्षण का निर्धारण करना होगा। इस वजह से प्रभागों के समीकरण एक बार फिर बदलने की संभावना है। नियमों के अनुसार प्रारूप प्रभाग रचना की घोषणा होने के बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की लाटरी निकाली जाएगी।
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किन प्रभागों में अनुसूचित जाति वर्ग और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला और पुरुष का वार्ड आरक्षित होगा, इस लाटरी में सुनिश्चित किया जाएगा। जानकारों की मानें तो 156 सदस्य संख्या वाली नई महानगर पालिका में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के कारण कुल 78 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी में 60 सीटें छोड़ 12 सीटें अनुसूचित जाति महिला तथा 6 सीटें अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित की जाएंगी।






