

Shivaji Maharaj vs Tipu Sultan Row: महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक हस्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी संकट में बदल गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की तुलना किए जाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इस तुलना को 'असहनीय' करार दिया है, वहीं सकपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने बयान पर कायम हैं और माफी नहीं मांगेंगे।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हर्षवर्धन सकपाल ने कथित तौर पर टीपू सुल्तान को वीरता के मामले में छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष बताया। उन्होंने तर्क दिया कि जहां शिवाजी महाराज वीरता और 'स्वराज्य' के प्रतीक हैं, वहीं टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ साहस के साथ लड़ाई लड़ी थी। सकपाल ने हाल ही में स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल यह कहा था कि दोनों ऐतिहासिक हस्तियों की तस्वीरें एक साथ लगाने में कोई समस्या नहीं है। सकपाल ने भाजपा पर उनके बयान को "तोड़-मरोड़ कर पेश करने" (Distorted) और झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि भाजपा महाराष्ट्र को "तालिबान" में बदलना चाहती है और उन्हें मिल रही धमकियों से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तुलना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने शनिवार को दिए अपने बयान में कहा कि शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान के बीच कोई भी तुलना अस्वीकार्य है। फडणवीस ने कहा कि शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना की और लोगों को मुगल शासन से मुक्त कराया, जबकि टीपू सुल्तान हजारों हिंदुओं की हत्या के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने सकपाल पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें इस तुलना पर शर्म आनी चाहिए और महाराष्ट्र इसे बिल्कुल भी सहन नहीं करेगा।
बता दें कि यह विवाद उस समय और गहरा गया जब मालेगांव के डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई गई। इस घटना ने पूरे राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सकपाल का कहना है कि वे अपनी बात पर अडिग हैं और बयान वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।