पारशिवनी में शिवसेना यूबीटी का मोर्चा (सौजन्य-नवभारत)
Parshivni News: किसानों की कर्ज माफी सहित सात बारा कोरा करने को लेकर की गई घोषणा के बाद सत्ता मिलने पर भी किसानों की समस्या जस की तस है। इसी समस्या पर शिवसेना यूबीटी के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम मस्के के नेतृत्व एवं पूर्व सांसद प्रकाश जाधव के मार्गदर्शन में किसानों द्वारा तहसील कार्यालय पर भव्य मोर्चा निकाला गया। इस मोर्चे में किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
मोर्चे में शामिल किसानों द्वारा राज्य सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। किसानों को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि राज्य विधानसभा चुनाव के समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा चुनावी भाषण में कहा गया था कि राज्य में भाजपा की सत्ता आने पर किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी करने के साथ ही उनका सात बारा कोरा किया जाएगा।
जनता ने केंद्र एवं राज्य दोनों जगह पूर्ण बहुमत की सरकार स्थापित कर दी, परंतु राज्य सरकार अपना वादा भूल गई। आज राज्य के मुख्यमंत्री कहते है कि किसानों की कर्ज माफी करना संभव नहीं है। बताया गया कि इस सरकार ने किसानों की भावनाओं के साथ खेला है। जिला प्रमुख पुरुषोत्तम मस्के ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस देश की 140 करोड़ जनता के पेट की आग बुझाने वाला किसान आज आत्महत्या कर रहा हैं, तथा सरकार अपने वादों का भूलकर राज्य में राजनीतिक रोटियां सेकने में मस्त है।
लगभग एक घंटे तक चले आंदोलन के बाद किसानों की विविध समस्याओं का एक ज्ञापन नायब तहसीलदार मुकेश मिश्रा को सौंपा गया। आंदोलन के सफलतार्थ प्रशांत लकड़कर, हेमराज चोखांद्रे, बंडु वैरागड़े, सुरेश आंबिलडुके, विजेंद्र चौहान, रितेश केलझरकर, बादल कुंभलकर, अनिल येरने, किशोर चौधरी, आकाश भोयर, शुभम परतेकी, शिशुपाल चिखले, चेतन सुरसे, सेवक पुंड, राजन मनघटे, शिशुपाल घोडमारे, सचिन सालवी, हिमांशु येलमुले, राहुल शेंडे आदि की उपस्थिति रही।
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किसानों की समस्या को लेकर तहसील कार्यालय आये प्रतिनिधिमंडल को जब वरिष्ठ अधिकारी जगह पर नहीं मिले तो पूर्व सांसद जाधव ने तहसील कार्यालय के अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि ‘किसानों की इतनी बड़ी समस्या लेकर हम यहां पर आये है, क्या बता रहे हो तुम, हमारे से मिलना नहीं है क्या, किसानों की इतनी बड़ी मांग को लेकर मुझे सभी से मिलना पड़ेगा कि नहीं।
उन्होंने कहा ये कैसी मस्ती है, ये कैसी मीटिंग है, हमने पहले ही संदेश दिया था न कि बड़े साहब से मिलना है। साहब को बाहर जाना था तो हमें पहले ही सूचना देना था। हम मिलने ही नहीं आते, बेकार के धंधे कर रहे हो क्या। जाधव ने पूछा राजनीतिक दल का तुम्हें निमंत्रण आया है तो तुम बोलेंगे नहीं क्या, वे कौन है, वे कहां गये हैं…’