नागपुर यूनिवर्सिटी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
RTMNU News: एनएसयूआई की ओर से राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं, विरोधाभास और पारदर्शिता के अभाव के गंभीर तथ्य सामने आने के आरोप लगाए गए हैं, जो सीधे-सीधे विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करते हैं। संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार RTMNU ने परीक्षा कार्यों के लिए कोएम्ट एजू टेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ करार किया है जबकि इसी प्रक्रिया में कोएम्ट और ग्लोबेरेना टेक्नोलॉजीज प्रा. लिमिटेड के संबंध में विवि का दृष्टिकोण परस्पर दो अलग तरह से विरोधाभासी दिखाई देता है। एक ओर विवि यह दावा करता है कि कोएम्ट एक स्वतंत्र कंपनी है और उसका ग्लोबेरेना से कोई संबंध नहीं है, दूसरी ओर कोएम्ट की पात्रता साबित करने के लिए ग्लोबेरेना के पूर्व अनुभव को मान्यता दी जा रही है।
यदि दोनों कंपनियां वास्तव में अलग हैं, तो फिर दूसरी कंपनी के अनुभव का लाभ देना नियमों और प्राकृतिक न्याय की भावना के विरुद्ध है। कोएम्ट द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में घोषित किया गया है कि कंपनी किसी भी संस्था द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं है और RTMNU ने इस दावे को स्वीकार किया है।
यदि व्यावहारिक रूप से कोएम्ट को ग्लोबेरेना से जुड़ी या उसी से उत्पन्न इकाई माना जाता है और ग्लोबेरेना के खिलाफ पूर्व में ब्लैकलिस्टिंग या अन्य विवादों के रिकॉर्ड मौजूद रहे हैं, तो कोएम्ट का यह शपथपत्र संदेहास्पद हो जाता है तथा विवि द्वारा की गई स्वीकृति भी प्रश्नों के घेरे में आ जाती है।
स्थिति यह है कि RTMNU ‘एक ही कंपनी होने’ के लाभ (जैसे पूर्व अनुभव) को स्वीकार कर रहा है, जबकि ‘एक ही कंपनी होने’ से जुड़े दायित्वों (जैसे ब्लैकलिस्टिंग और पूर्व विवाद) को नजरअंदाज कर रहा है। यदि ग्लोबेरेना के अनुभव को पात्रता से अलग कर दिया जाए, तो उपलब्ध शर्तों के अनुसार कोएम्ट पात्रता मानदंडों को पूर्ण नहीं करती और ऐसी स्थिति में कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था।
इसी प्रकार, रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि तेलंगाना सहित अन्य राज्यों में इसी समूह/कंपनी के कामकाज से जुड़े गंभीर विवाद हुए हैं, जिनमें परीक्षा में गड़बड़ी और छात्र की आत्महत्या जैसे संवेदनशील मामले शामिल रहे हैं। ऐसे उदाहरणों के बावजूद यदि नागपुर विवि उसी कंपनी या उससे जुड़ी इकाई को विद्यार्थियों की परीक्षा का कार्य सौंपता है, तो यह अत्यंत गैर जिम्मेदाराना और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
एनएसयूआई के पदाधिकारियों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पात्रता मानदंडों, अनुभव प्रमाणपत्रों, दस्तावेजों तथा पूर्व कामकाज की पर्याप्त व निष्पक्ष जांच नहीं की गई। विवि प्रशासन द्वारा कंपनी के अनुभव और दस्तावेजों की समुचित जांच किए बिना तीन वर्ष के लिए अनुबंध करना परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
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वहीं उपकुलपति कार्यालय से एनएसयूआई के पदाधिकारियों को बार-बार दिए गए अपॉइंटमेंट के बावजूद मुलाकात से बचा जा रहा है, जिससे यह संदेह और गहरा होता है कि प्रशासन छात्रों के सवालों का सामना नहीं करना चाहता। जब एनएसयूआई ने समय रहते वैकल्पिक सुझाव एवं आपत्तियां लिखित रूप में रखीं थीं, उपकुलपति ने स्वयं जिम्मेदारी लेते हुए कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, परंतु अब जवाबदेही से बचने का प्रयास किया जा रहा है।
एनएसयूआई का कहना है कि दोनों कंपनियों के बीच संबंधों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की जाए। सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने कि यदि दोनों कंपनियां वास्तव में अलग हैं, तो कोएम्ट को ग्लोबेरेना के अनुभव का लाभ किस वैधानिक आधार पर दिया गया? संपूर्ण प्रकरण की जांच के लिए बाहरी विशेषज्ञों, न्यायिक/कानूनी विशेषज्ञ और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए स्वतंत्र जांच समिति करने की मांग की गई है।