High Court order:नायलॉन मांझे (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur News: नायलॉन और सिंथेटिक मांझे से होने वाले गंभीर व घातक परिणामों को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब नायलॉन मांझे का उपयोग करने या इसका व्यापार करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
अदालत के आदेश के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति नायलॉन मांझे से पतंग उड़ाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि उल्लंघन करने वाला नाबालिग पाया गया, तो यह जुर्माना उसके माता-पिता से वसूला जाएगा। अदालत ने कहा है कि बच्चों को जिम्मेदार व्यवहार और आत्म-नियंत्रण सिखाना माता-पिता का कर्तव्य है, ताकि वे अपने कृत्यों के दुष्परिणाम समझ सकें।
नायलॉन मांझे के अवैध व्यापार पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट ने विक्रेताओं पर 2,50,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया है। यह दंड न केवल बेचने पर, बल्कि नायलॉन मांझे का स्टॉक रखने पर भी लागू होगा। खास बात यह है कि प्रत्येक उल्लंघन पर यह जुर्माना अलग-अलग लगाया जाएगा।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस जुर्माने से एकत्रित राशि ‘पब्लिक वेलफेयर अकाउंट’ में जमा की जाएगी। इस खाते का संचालन नागपुर जिलाधिकारी, मनपा आयुक्त और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार की संयुक्त समिति करेगी। इस राशि का उपयोग नायलॉन मांझे से घायल हुए लोगों के इलाज पर किया जाएगा।
कोर्ट ने प्रशासन को डिजिटल माध्यमों के अधिकतम उपयोग के निर्देश दिए हैं। छापेमारी करने वाले अधिकारियों के पास जुर्माना वसूलने के लिए QR कोड उपलब्ध रहेगा। यदि कोई व्यक्ति तुरंत जुर्माना अदा नहीं कर पाता है, तो उसे 15 दिनों का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद जुर्माना भू-राजस्व (Land Revenue) की तरह वसूला जाएगा, जिसमें संपत्ति कुर्की का भी प्रावधान है। प्रत्येक जिले का साइबर सेल नायलॉन मांझे से जुड़ी शिकायतों के लिए एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाएगा।
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यदि किसी क्षेत्र में नायलॉन मांझे के कारण कोई गंभीर या अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा कि उन्होंने ड्यूटी में लापरवाही क्यों बरती।
हाई कोर्ट ने सभी पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि 13 और 14 जनवरी 2026 को सभी प्रमुख समाचार पत्रों में इस जुर्माने संबंधी आदेश की सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि “जानकारी नहीं थी” का बहाना जुर्माने से बचने के लिए मान्य नहीं होगा।